हरिद्वार हरिद्वार के मशहूर घाट हर की पौड़ी में बहने वाली गंगा को उसकी खोई हुई पहचान वापस मिलेगी। यहां गंगा को फिर से नदी की पहचान वापस मिलेगी। दरअसल 2016 में सरकार ने पर गंगा को स्क्रैप चैनल का नाम दे दिया गया था। इससे यहां बहने वाली गंगा की जलधारा को नदी न मानकर नहर का दर्जा दिया गया था। इसके लिए एक शासनादेश भी जारी किया गया था। उस वक्त साधु-संत समेत तीर्थ पुरोहितों ने इसका पुरजोर विरोध किया था। 2017 में बीजेपी सरकार आने के बाद साधु-संत और तीर्थ पुरोहित इस आदेश को करवाने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अब जाकर उन्हें कुछ उम्मीद जगी है। हरीश रावत बोले, 'स्क्रैप चैनल न बताते तो 300 इमारतें गिरतीं'दो दिन पहले हरिद्वार एक निजी कार्य्रकम में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 2016 के शासनादेश को लेकर साधु-संत और पुरोहित समाज से माफी मांगी। उन्होंने बताया कि उस समय सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की तलवार लटकी हुई थी, अगर टेक्निकल बदलाव न करते तो कम से कम 300 इमारतों को ध्वस्त करना पड़ता। इसी को लेकर दर्जन भर लोग उनसे मिले और कोई हल निकालने का निवेदन किया। समस्या को समझते हुए उन्होंने तकनीकी बदलाव करने का फैसला लिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने मौजूदा सरकार को शासनादेश रद्द करने को स्वतंत्र बताया। कानूनी सलाह के लिए भेजा गया प्रस्ताव गुरुवार को मुख्यमंत्री ने ऐसा अंदेशा दिया है कि इस शासनादेश को रद्द करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। कानूनी प्रक्रिया के लिए फाइल को भेज दिया गया है। जल्द ही औपचारिक घोषणा भी कर दी जाएगी। गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने बताया कि शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक से बात हुई है। मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि फाइल को कानूनी राय लेने के लिए भेज दिया है, जल्द ही तकनीकी बदलाव करके यह शासनादेश रद्द कर दिया जाएगा। तन्मय ने कहा कि सरकार के इस फैसले का हम स्वागत करते हैं। हमें उम्मीद है कि सरकार जल्द मां गंगा की गरिमा के अनुरूप कोई अच्छा फैसला लेगी।
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