करन खुराना, कोरोना महामारी की वजह से हुए लॉकडाउन को अब भले ही अनलॉक के नाम से जाना जा रहा है, लेकिन व्यवस्थाएं अभी भी पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। हरिद्वार के सबसे बड़े औद्योगिक इकाई सिडकुल की कंपनियों के पास काम नहीं है। किसी कंपनी के टेक्निकल लोग अपने घर वापस चले गए हैं तो कहीं पर माल नहीं आ रहा। कमोबेश इस क्षेत्र की सभी कंपनियों का यही हाल है। किसी इकाई में कच्चा माल महंगा हो गया, तो किसी इकाई के पास ऑर्डर नहीं हैं। इन सब समस्याओं की वजह से इस वक्त सिडकुल स्थित कंपनियां करोड़ों रुपये का नुकसान झेल रही हैं। सिडकुल असोसिएशन के महासचिव राज अरोड़ा ने बताया कि फिलहाल 400 कंपनियों में से 300 कंपनियां काम कर रही हैं, उनमें से भी कई ऐसी कंपनीज है जिनके पास कोई न कोई समस्या चल रही है। पहले कच्चा माल ऑर्डर लगाने के एक हफ्ते तक आ जाता था अब तीन हफ्ते में कच्चा माल आ रहा है। कच्चा माल, लेबर, ऑर्डर, कच्चे माल का दाम जैसी तमाम समस्याओं की वजह से इस वक्त सिडकुल एक बुरे दौर से गुजर रहा है। तकरीबन 2500 से 3000 करोड़ के नुकसान का इस वक्त अनुमान लगाया गया है। वहीं दूसरी ओर हरिद्वार के रुड़की क्षेत्र की दर्जनों कंपनियों में काम आधा हो चुका है जिसका सीधा असर लेबर पर पड़ा है। साथ ही फार्मा कंपनियों में सैनिटाइजर और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ी है।
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