पुलकित शुक्ला, हरिद्वार में अगले साल होने वाले कुंभ मेले में लगभग साढे़ 5 महीने का समय बचा है। कोरोना के प्रकोप के चलते कुंभ मेले के आयोजन पर असर पड़ सकता है। पिछले महीने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कुंभ के स्वरूप पर फरवरी में समीक्षा कर निर्णय लेने की बात कही थी, लेकिन मेले के स्वरूप पर सरकार और के बयानों में विरोधाभास नजर आ रहा है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मंत्री की मुलाकात में यह विरोधाभास सामने आया। कोरोना महामारी के चलते कुंभ मेले के स्वरूप पर संशय अभी बरकरार है। हालांकि सरकार और साधु-संतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अपने अपने स्तर पर कुंभ मेले की तैयारियों में जुटी हैं। कुंभ के स्वरूप को लेकर अखाड़ा परिषद और सरकार के बयानों में विरोधाभास साफ नजर आ रहा है। नरेंद्र गिरी बोले, उतना भव्य नहीं होगा कुंभ शनिवार को शहरी विकास मंत्री और सरकारी प्रवक्ता हरिद्वार पहुंचे और अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी से मुलाकात की। इस मुलाकात में कुंभ की तैयारियों और कुंभ आयोजन के स्वरूप को लेकर चर्चा हुई। मीडिया से बात करते हुए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी सरकार की वर्तमान तैयारियों से तो संतुष्ट नजर आए, लेकिन उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के मद्देनजर कुंभ मेला उतना भव्य और दिव्य नहीं हो पाएगा जैसा कि होना चाहिए। हालांकि साधु संतों की सभी परंपराएं विधिवत निभाई जाएंगी। मंत्री बोले, भव्य और दिव्य ढंग से होगा कुंभ जबकि सरकार के प्रवक्ता और मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि कुंभ में किसी भी तरह का कोई परिवर्तन नहीं है। कुंभ मेले का आयोजन भव्य और दिव्य ढंग से होगा। अखाड़ा परिषद और सरकार के बयानों में यह विरोधाभास तब देखा गया है, जब कोरोना महामारी के कारण कुंभ मेले के प्रतीकात्मक आयोजन को लेकर भी सरकार की ओर से संकेत दिए जा रहे हैं। आपको बता दें कि पिछले महीने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा था कि अगर कोरोना से बिगड़े हालात नहीं सुधरे तो मेले का आयोजन प्रतीकात्मक ढंग से हो सकता है। अलगे साल 11 मार्च के शाही स्नान से पहले फरवरी में समीक्षा कर निर्णय लिया जाएगा।
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