Success Story: बिहार में मधुबनी के रहिका के रहने वाले 25 वर्षीय युवा राजा कुमार पासवान जूट क्राफ्ट से बड़ी सफलता हासिल की है. वह एक दिन में 2 लाख तक सेल कर स्टार्टअप को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं. जूट क्राफ्ट से मजबूत बोरे (गन बैग) जूट से बैग, घर की सजावट की वस्तुएं, पर्दे बनाना आसपास के कई लोगों को सिखा रहे हैं. इसके साथ ही कई लोगों को रोजगार भी दिए है. आज देश के हर राज्य के बड़े-बड़े मेले में इस प्रोडक्ट की बिक्री होती है. बता दें कि जूट पर्यावरण के अनुकूल है. इसकी मांग मार्केट में बढ़ती जा रही है.
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रविवार, 1 मार्च 2026
अमृता सोमन ने पारंपरिक घी से बनाया हेल्दी ब्रांड 'ऋषामृत', आज हर घर में है डिमांड, जानें कैसे की शुरुआत
Amrita Soman Success Story: मुंबई की अमृता सोमन ने 2018 में ऋषामृत की स्थापना की, जो शुद्धता और विश्वास का प्रतीक है. यहां देसी गिर गाय के शुद्ध घी, ड्राई फ्रूट्स लड्डू, सत्तू लड्डू और रागी-ओट्स लड्डू के साथ हेल्दी स्प्रेड्स तैयार किए जाते हैं. नया आउटलेट लाइव घी कॉन्सेप्ट के साथ है, जहाँ ग्राहक बिलोना विधि से बनने वाला घी बनते देख सकते हैं. बिलोना प्रोसेस में पूरे दूध से मक्खन निकाला जाता है और 25-30 लीटर दूध से मात्र 1 किलो घी बनता है, जो स्वाद, सेहत और पारंपरिक दानेदार बनावट में श्रेष्ठ है.
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शनिवार, 28 फ़रवरी 2026
Success Story: मजदूर से मालिक बने छपरा के विनय, गांव में ही खड़ा कर दिया ये उद्योग, आज है लाखों में कमाई
Chhapra Success Story: बिहार में छपरा जिले के रहने वाले विनय प्रसाद ने फाइबर सजावट का उद्योग शुरू कर कई युवाओं को रोजगार दिया है. उन्होंने बताया कि एक समय वह हरियाणा में मजदूरी का काम करते थे. हालांकि आज उनका सामान बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत कई राज्यों में बिक रहा है.
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Video: पपीता खाइए, बीज से तिजोरी भरिए! ₹1500 किलो बिक रहा है वेस्ट, 60 दिनों में किसान मालामाल
Papaya Seed Business: खेती में नवाचार कैसे फर्श से अर्श तक पहुंचा सकता है, इसका जीवंत उदाहरण वैशाली के किसान धर्मेंद्र सिंह ने पेश किया है. आमतौर पर पपीता खाने के बाद फेंक दिए जाने वाले बीज अब काला सोना साबित हो रहे हैं. धर्मेंद्र ने पारंपरिक फल बिक्री से इतर बीजों की प्रोसेसिंग शुरू कर महज दो महीने में लाखों का मुनाफा कमाकर सबको हैरान कर दिया है. धर्मेंद्र बताते हैं कि पपीते के बीजों की मांग नर्सरी, हाइब्रिड खेती और आयुर्वेदिक दवाओं में तेजी से बढ़ी है. प्रक्रिया बेहद सरल है. पके फल से बीज निकालकर उनकी चिपचिपी परत धोकर छाया में 7-10 दिन सुखाया जाता है. कम लागत वाली इस तकनीक से तैयार बीज बाजार में ₹800 से ₹1500 प्रति किलो तक बिक रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एक एकड़ की फसल से प्राप्त बीजों से किसान अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं. सरकारी योजनाओं के सहयोग से अब वैशाली के अन्य किसान भी इस वेस्ट टू वेल्थ मॉडल को अपनाकर आर्थिक मजबूती की नई इबारत लिख रहे हैं.
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शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026
Video: खेती से 10 लाख की सालाना कमाई! इस किसान ने 8 एकड़ में आलू, मक्का-गोभी का तैयार किया 'बिजनेस मॉडल'
Profitable Farming Model: बिहार के अररिया जिले के किसान गुलाम मुस्तफा ने पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़कर मुनाफे का नया मॉडल पेश किया है. रानीगंज प्रखंड के लाल मोहननगर निवासी मुस्तफा महज 8 एकड़ जमीन पर आलू, मक्का और फूलगोभी जैसी फसलों के जरिए सालाना 10 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं. मुस्तफा के अनुसार, आलू की बंपर पैदावार के लिए मिट्टी की तैयारी सबसे अहम है. वे प्रति हेक्टेयर 30 टन जैविक खाद के इस्तेमाल की सलाह देते हैं. जिससे मिट्टी भुरभुरी बनी रहती है. उन्होंने बड़े बाजारों से उन्नत बीज मंगाए हैं, जो 70-90 दिनों में तैयार होकर प्रति एकड़ 90 क्विंटल तक उत्पादन देते हैं. दो एकड़ में आलू की खेती से करीब 4 लाख की आय होती है. आलू के साथ-साथ वे मक्का, पत्तागोभी और टमाटर की खेती भी करते हैं, जिससे सालभर नकदी का प्रवाह बना रहता है. 15 वर्षों का अनुभव साझा करते हुए मुस्तफा कहते हैं कि दिसंबर-जनवरी के दौरान फसल बाजार में लाने पर ऊंचे दाम मिलते हैं, जो किसानों के लिए जैकपॉट साबित होता है.
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Success Story: लोन ने दिया नया जीवन, पहले ₹1 भी नहीं था...अब ये अनोखी साड़ी बनाकर लाखों कमाती हैं रांची की सुनीता
Ranchi Success Story: झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली सुनीता लकड़ा 25 महिलाओं के साथ मार्शल प्राथमिक बुनकर सहयोग समिति समूह से जुड़ी हैं. वहां जुड़कर सुनीता कजरी कॉटन साड़ी बनाती हैं. इसके साथ ही रांची ही नहीं, देशभर में स्टॉल लगाती हैं. आज वह इससे तगड़ी कमाई कर रही हैं.
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गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026
Video: 30 डिसमिल खेत से 70 दिनों में कमाया तिगुना लाभ! इस किसान को देख बड़े बिजनेसमैन भी हैरान
Success Story: पारंपरिक खेती में कम होते मुनाफे के बीच बोकारो के पेटरवार प्रखंड के अंबाडीह गांव से सफलता की एक शानदार कहानी सामने आई है. यहां के प्रगतिशील किसान राजेश महतो ने महज 30 डिसमिल जमीन पर हाइब्रिड चुकंदर उगाकर ₹60,000 की बंपर कमाई की है. राजेश ने बाजार की मांग को भांपते हुए लीक से हटकर खेती शुरू की. उन्होंने अक्टूबर में बुवाई की और मात्र 70 दिनों में फसल तैयार कर ली. इस स्मार्ट खेती का गणित बेहद आकर्षक है. जहां कुल लागत सिर्फ ₹12000 आई. वहीं पैदावार 15 क्विंटल तक रही. ₹5000 प्रति क्विंटल के बाजार भाव ने उन्हें लागत से तीन गुना मुनाफा दिलाया. राजेश बताते हैं कि सफलता का राज भुरभुरी मिट्टी और सटीक सिंचाई प्रबंधन में है. चुकंदर की खेती में कम प्रतिस्पर्धा होने के कारण उन्हें बिक्री में भी कोई समस्या नहीं हुई. आज राजेश की यह 'स्मार्ट फार्मिंग' तकनीक पूरे जिले के किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है.
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