रविवार, 22 फ़रवरी 2026

पारंपरिक खेती छोड़ अपनाई गेंदा फूल की खेती, सीजन में मिल रहा ₹150 किलो तक भाव

Success Stoy: बोकारो जिले के चास प्रखंड की उलगोड़ा गांव निवासी चंचला कुमारी ने पारंपरिक खेती से अलग हटकर गेंदा फूल की खेती कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है. नवंबर में 50 डिसमिल जमीन पर करीब 5000 पौधों के साथ शुरू की गई इस खेती में लगभग ₹15 हजार की लागत आई और 3–4 महीने में उत्पादन शुरू हो गया. शादी-विवाह और पूजा सीजन में ₹50 से ₹150 प्रति किलो तक भाव मिलने से वे औसतन ₹30 हजार तक की कमाई कर रही हैं, जिससे फूलों की खेती उनके लिए लाभदायक विकल्प साबित हो रही है. रिपोर्ट- कैलाश कुमार गोपे

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25 साल से किसान कर रहा है गुलाब की खेती, तीन बीघा में 5 लाख की कमाई, बाजार में है इनके फूल की डिमांड

किसान जो की पिछले 25 वर्षों से गुलाब की खेती करते आ रहे हैं. मात्र तीन बीघा में हजारों रुपए की कमाई हो रही है. शादियों के सीजन में फूलों की डिमांड रहती है तो वहीं फूलों की बिक्री खेतों से हो जा रही है. शादियों में जयमाला स्टेज, दूल्हे की गाड़ी और दुल्हन के लिए फूलों की चादर तैयार करते हैं. जिस प्रकार फूलों से गुलदस्ता और माला व पूजा में प्रयोग किया जाता है. यही कारण है कि गुलाब की फसल ने किसानो के जीवन में बहार ला दी है.

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Success Story: खेतों में की किसानी, फिर रचा इतिहास! सेना में अनफिट होने के बाद ऐसे बने ऑर्थोपेडिक सर्जन

Success Story: सफलता कभी सीधी लकीर नहीं होती. पूर्णिया के मशहूर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ.अंगद कुमार चौधरी की कहानी इसका जीवंत प्रमाण है. टिकापट्टी रूपौली जैसे बिजली विहीन गांव से निकलकर चिकित्सा जगत के शिखर तक पहुंचने का उनका सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. शुरुआत में डॉ.अंगद इंजीनियरिंग और सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे थे. सेना की लिखित परीक्षा पास करने के बावजूद मेडिकल अनफिट होने पर उन्हें गहरा धक्का लगा. लेकिन, नियति को कुछ और ही मंजूर था. पिता का सपना और भाई की एक जटिल सर्जरी को करीब से देखने के बाद उनकी सोच बदल गई. उन्होंने तय किया कि वह अब लोगों के हड्डियों का दर्द दूर करेंगे. किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले डॉ.अंगद पढ़ाई के साथ-साथ पिता के साथ खेतों में काम भी करते थे. 2006 में दरभंगा मेडिकल कॉलेज में चयन के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. एमसीएच पटना और कोलकाता मेडिकल कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की. वह पूर्णिया के लाइन बाजार में अपनी क्लीनिक के जरिए गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा कर रहे हैं. डॉ.अंगद की कहानी सिखाती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो असफलताएं रास्ता रोकने के बजाय एक नई और बेहतर राह की शुरुआत बन जाती हैं.

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पढ़ाई भी, कमाई भी! अधिकारी बनने के लिए अंबिकापुर का युवा बेच रहा यूनिक सोया समोसा, इलाके में क्रेज

Ambikapur yuva soya samosa startup story : अर्पित कंसारी का देव नाश्ता सेंटर अंबिकापुर में अनोखे सोया समोसे, इडली-सांभर, कटलेट और मंगोड़ा के लिए प्रसिद्ध है, जो पूरी तरह हेल्दी और शाकाहारी हैं. खास बात यह है कि अर्पित सिविल की तैयारी कर रहे हैं.

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शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

Success Story: दादी की आइडिया ने बदल दी दीपक की जिंदगी, घर बैठे बना रहे 14 वैरायटी का अचार, अब बड़ा कारोबार का है प्लान

Chhapra Dadi Amma Achar Brand: बिहार में छपरा के बहुआरा गांव निवासी दीपक सिंह द्वारा दादी अम्मा ब्रांड नाम से 14 प्रकार का अचार के अचार तैयार किए जा रहे हैं. इस अचार की मांग बिहार के कई शहरों में है. आज वह इससे तगड़ी कमाई कर रहे हैं. इसके साथ ही दो महिलाओं को रोजगार भी दिया है.

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Agri Tips: रांची के किसान का कमाल! एक पौधे से 5 किलो बैंगन! तैयार किया अमर पौधा, हर दूसरे दिन 2 हजार की कमाई

Brinjal Farming Tips: रांची के कांके निवासी मनोज महतो ने बैंगन की खेती में 'ग्राफ्टिंग' और 'मल्चिंग' तकनीक का इस्तेमाल कर मिसाल पेश की है. एक पौधे से 5 किलो पैदावार लेकर वे हर दूसरे दिन हजारों की कमाई कर रहे हैं. उनकी सफलता को देखकर आसपास के अन्य किसान भी अब ग्राफ्टिंग तकनीक सीखने के लिए उनके पास पहुँच रहे हैं.

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छपरा के युवा किसान का 'फ्लोरल' जादू! एक ही पौधे में खिल रहे मल्टीकलर गुलाब, पुश्तैनी धंधे में फूंकी नई जान

Success Story: छपरा के युवा प्रगतिशील किसान अभिषेक कुमार ने आत्मा से प्रशिक्षण लेकर फूलों की खेती को मुनाफे का आधुनिक व्यवसाय बना दिया है. अपनी तीसरी पुश्तैनी पीढ़ी के काम को नई तकनीक से जोड़ते हुए अभिषेक अब खुद की नर्सरी में 50 से अधिक वैरायटी के गुलाब तैयार कर रहे हैं. उनके टाटा सेंचुरी और मल्टीकलर गुलाबों की खासियत यह है कि वे 20 दिनों तक ताजे रहते हैं. एक ही पौधे में कई रंगों के फूल खिलते हैं.

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