देहरादून उत्तराखंड सरकार ने देवप्रयाग में एक डिस्टलरी प्लांट को लाइसेंस दे देकर विवाद को जन्म दिया है। ‘हिल टॉप’ नाम से एक विस्की प्लांट यहां लगने से विवाद पैदा हो गया है। इस शराब के कारोबार से अब सियासी कोहराम मचा हुआ है। इस मामले में बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे है। भारतीय जनता पार्टी कहती है कि इस हिलटॉप की कहानी कांग्रेस राज से शुरू हुई है। बीजेपी पर तोहमत है कि उसकी जान तो हिंदुत्व के अजेंडे में बसी है, फिर आखिर कैसे बीजेपी देवप्रयाग जैसे धार्मिक स्थल से शराब कारोबार को अनुमति दे सकती है। अब बीजेपी आरोप लगा रही है कि देवप्रयाग क्षेत्र में डिस्टलरी लगने की शुरुआत कांग्रेस के जमाने में ही आगे बढ़ी। सूत्र बताते हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के जमाने में इस संबंध में बात शुरू हुई थी। बहुगुणा अब बीजेपी में हैं। सरकार ने इस पर अनुमति जारी कर दी थी लेकिन इसका भारी विरोध देखते हुए कदम रुक गए। बीजेपी सरकार के राज में इस हिल टॉप ब्रांड डिस्टलरी से सोशल मीडिया मे कोहराम मचा हुआ है। मामले के सुर्खी बटोरने के चलते पूरे मामले में सीएम सिंह रावत ओर बीजेपी असहज भी नजर आ रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के अनुसार पिछली कांग्रेस सरकार ये सब करके गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने ये भी कहा कि इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा, राजस्व बढ़ेगा और उत्तराखंड के फलों और फूल का 10 फीसदी इसमें प्रयोग किया जाएगा। ‘हिल टॉप’ मामले के उछलने के बाद उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत भी इस प्रकरण के केंद्र में आ गए हैं। आरोप है कि उनकी सरकार ने ही देवप्रयाग क्षेत्र में बॉटलिंग प्लांट की स्थापना के लिए अनुमति प्रदान की थी। इन स्थितियों में पूर्व सीएम हरीश रावत भी इस मामले में खुलकर बोल रहे है। मीडिया से बातचीत में मंगलवार को हरीश रावत ने कहा कि उनकी सरकार ने फ्रूट वाइन के लिए लाइसेंस मंजूर किया था, जिसे मौजूदा सरकार ने बदल दिया है। उन्होंने कहा कि आबकारी नीति में बदलाव उनकी सरकार ने यह सोचकर किया था कि पहाड़ी फलों का बेहतर इस्तेमाल हो सके। उन्होंने सफाई दी कि जब विरोध शुरू हो गया, तो प्लांट रोक दिया था। उन्होंने कहा कि प्लांट को गंगा किनारे किसी भी जगह पर नहीं लगाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार इससे उलट यहां शराब का प्लांट लगाने का काम कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि उनकी सरकार में गलत हुआ तो त्रिवेन्द्र सरकार ने इन 2 सालो में इस पर फुल स्टॉप क्यों नहीं लगाया।
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