शिवानी आजाद, हरिद्वार चाहे चारधाम यात्रा के तीर्थयात्री हों, अडवेंचर स्पोर्ट्स के शौकीन हों या फिर हिमालय की वादियों में शादी की प्लानिंग कर रहे हों अब जल्द ही सभी को ग्रीन टैक्स अदा करना होगा। यह टैक्स कितना होगा इसे स्थानीय नगर निकाय तय करेंगे। इससे मिलने वाला राजस्व उस क्षेत्र के विकास और पर्यावरण की स्वच्छता बनाए रखने के लिए होगा। उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हाल ही में वन और पर्यावरण मंत्री हरक सिंह रावत के साथ एक बैठक में पर्यटकों के कारण बढ़ते प्रदूषण का मामला उठाया था। हाल ही में औली में हुई गुप्ता बंधुओं की शादी के बाद समारोहस्थल पर टनों कूड़ा पड़ा रह गया था। पढ़ें: कुछ दिन पहले पर हुई थी चर्चा टूरिस्टों की वजह से होने वाली प्लास्टिक के कचरे की समस्या से निबटने के लिए कुछ दिनों पहले ही हरक सिंह रावत ने राज्य में 'प्लास्टिक टैक्स' लगाने की बात कही थी। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, 'उत्तराखंड में पर्यावरण टैक्स लगाने की सख्त जरूरत है।' नगर निकाय तय करेंगे टैक्सउन्होंने बताया कि एक ऐसी योजना बनाई जा रही है स्थानीय नगर निकाय तय कर सकेंगे कि उनके क्षेत्र में आने वाले लोगों पर कितना टैक्स लगाया जाए। ऐसा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के प्रावधानों के तहत होगा। रावत का कहना था, ' हमें इस बात का अहसास हुआ है कि जब तक इस तरह का ईको टैक्स नहीं लगाया जाता है, तब तक हम पर्यावरण का संरक्षण करने के लिए जरूरी वित्तीय क्षमता नहीं जुटा पाएंगे।' उन्होंने कहा, 'वसूल की जाने वाली राशि मैदानी इलाकों में कम और पहाड़ियों में अधिक होगी। मैदानी इलाकों में, हम 1 किलो ठोस कचरे के निपटान के लिए मुश्किल से 20 रुपये खर्च करते हैं जबकि पहाड़ियों में हम 40 से 50 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।' पढ़ें: सूत्रों ने कहा कि राज्य सरकार यह टैक्स इसलिए भी लगाने पर विचार कर रही है क्योंकि उसे नहीं लगता कि केंद्र से मिलने के उसके प्रस्ताव को मंजूरी मिलेगी। हिमाचल प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में ग्रीन टैक्स का प्रावधान है। वहां गैर हिमाचली नंबर प्लेट वाली गाड़ियों को मनाली में प्रवेश पाने के लिए ग्रीन फीस देनी होती है।
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