गुरुवार, 13 अगस्त 2020

Uttarakhand news: पुल टूटने से सीमांत क्षेत्रो में राशन की भारी किल्लत, लोग परेशान

करन खुराना, कुमाऊँ में बारिश हर साल आफत लेकर आती है। ऐसी कई है जो इस दौरान बुरे दिन और कई परेशानियों से रूबरू होते है। हालात इस कदर हो जाती है जैसे मानो कोई युद्ध की स्थिति हो। इन सीमांत क्षेत्र में पड़ रही आफत का कारण है बारिश और भूस्खलन, बारिश और भूस्खलन से धापा,टांगा समेत तमाम गांव में लोग बेघर हो गये और पुनर्वास की आस लगाए बैठे है। वहीं दूसरी और मदकोट को जोड़ने वाले दो पुल टूटने से मदकोट कस्बे ने आवश्यक वस्तु की आपूर्ति ठप पड़ गयी। इन क्षेत्रों में हालात इस कदर खराब है कि सब्जी की दुकानों से प्याज गायब है और परचून की दुकानों से आटा और चीनी गायब है। जिस दुकान पर चावल है तो वो चावल 35 रुपये प्रति किलो की जगह 75 रुपये प्रतिकिलो मिल रहा है। फल के दाम आसमान छू रहे है, ऐसे में वहां के स्थानीय निवासी प्राकृतिक आपदा के साथ साथ रोटी की मुश्किलें भी झेल रहे है। रास्ता बंद होने से नहीं हो पा रही सप्लाई बारिश की वजह से मदकोट सड़क पर स्थित पुल 18 जुलाई की रात आई बारिश से बह गया और इसी मार्ग से मदकोट के लिए सामान की सप्लाई हो रही थी। 27 जुलाई को जौलजीवी और मदकोट को जोड़ने वाला चामी पुल भी बह गया। तब से मदकोट कस्बा अलग थलग पड़ा है। दोनों और से बाधित रास्ते की वजह से जरूरी सामान की सप्लाई नही हो पा रही है। दिल दहला देने वाली है आपदा कुछ दुकानदारों ने धुलाई से राशन सहित अन्य जरूरी सामना मंगवाया तो धुलाई के कारण सामान महंगा हो गया और चावल,नमक,दाल और आटा समेत सभी राशन वस्तु महंगी हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मुनस्यारी पहुंचे और उन्होंने इस आपदा को दिल दहलाने वाली आपदा बताया,हरीश रावत ने कहा कि सरकार को तुरंत टीम भेजकर राहत कार्य शुरू करवाने चाहिए। कुमाऊँ मंडल आयुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी ने बुधवार को मुनस्यारी में आपदा से हुई क्षति के बाद चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्य का निरीक्षण किया और आपदा प्रभावित गांवों का दौरा किया। आपदा राहत शिविरों में रह रहे लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी।


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