शिवानी आजाद, हरिद्वार वन विभाग ने गुरुवार को लालढांग गांव से एक ग्रामीण को शिवालिक रेंज में तीन तेंदुओं की हत्या के आरोप में अरेस्ट किया है। अधिकारियों के अनुसार, इस शख्स ने अपने कुत्ते की मौत का बदला लेने के लिए इन तेंदुओं की हत्या की है। राजाजी नैशनल पार्क के डायरेक्टर पीके पात्रो ने बताया, 'आरोपी सुखपाल ने माना है कि उसके दो कुत्तों में से एक को तेंदुए ले गए थे, दूसरा छोटा था लेकिन वह भी कुछ दिनों पहले हुए एक हमले में बुरी तरह से घायल हो गया था। इसके मरने के बाद सुखपाल ने पिल्ले के शरीर पर कीटनाशक छिड़ककर उसे जंगल के भीतर फेंक दिया था।' तेंदुओं के पेट से मिले सबूत 5 अगस्त को हरिद्वार, लैंसडाउन और राजाजी फॉरेस्ट डिविजन से तीन तेंदुओं के शव मिले। इन्हें पहली नजर में ही देखकर समझ आ गया कि यह हत्या 'बदला लेने' के लिए की गई है। बाद में हुई जांच में पता चला कि पोस्टमॉर्टम में तीनों के पेट से पिल्ले के बाल और सॉफ्ट टिशू मिले हैं। पाया गया खतरनाक कीटनाशक लैंसडाउन के डीएफओ वैभव सिंह का कहना है, 'लैंसडाउन के फॉरेस्ट डिविजन के वाइल्ड लाइफ ऑपरेशंस ग्रुप ने इस मामले की जांच की और पाया कि इन तेंदुओं की मौत जिस कीटनाशक से हुई है उसका इस्तेमाल वन विभाग की नर्सरी में होता है।' जांच में यह भी पता चला कि सुखपाल की पत्नी इन नर्सरियों में से एक में अनुबंध पर काम करती है। इससे हमें सुखपाल पर शिकंजा कसने में मदद मिली। पूछताछ के दौरान सुखपाल ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। पढ़ें: केवल वन विभाग की नर्सरी में मिलता है एक वन्य अधिकारी ने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'यह बदला लेने के लिए की गई हत्या ही है क्योंकि इसमें इस्तेमाल किया जाने वाला कीटनाशक किलर 505 जो मृत पिल्ले पर छिड़का गया था वह केवल जंगल की नर्सरी में इस्तेमाल किया जाता है।' पशु तस्करी की भी जांच बुधवार को सुखपाल को मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, उसके बाद अरेस्ट कर लिया गया। वन विभाग ने उसे 12 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है ताकि यह जांच की जा सके कि कहीं घटना का संबंध पशु तस्करी से तो नहीं है।
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