देहरादून, सात अगस्त (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में दोनों मुख्यमंत्रियों ने अदालत को उस फैसले की समीक्षा करने को कहा था जिसमें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल खत्म होने के बाद सरकारी आवासों में रहने पर बाजार भाव के हिसाब से पूर्व मुख्यमंत्रियों को किराया भुगतान करने को कहा गया था। मुख्य न्यायमूर्ति रमेशन रंगनाथन और न्यायमूर्ति आर सी खुल्बे की एक पीठ ने दो पूर्व मुख्यमंत्रियों भगत सिंह कोशियारी और विजय बहुगुणा की याचिका को ‘विचार योग्य’ और ‘ कानूनी रूप से नहीं टिकने’ वाला बताया। उच्च न्यायालय ने पिछले साल दिसंबर में मुख्यमंत्रियों को कार्यकाल के बाद मिले सरकारी आवासों के आवंटन को अवैध घोषित कर दिया था। अदालत ने यह फैसला देहरादून के एक गैर सरकारी संगठन की याचिका पर सुनाया था। आदेश के बाद सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सरकारी आवास खाली कर दिए थे। लेकिन यह एनजीओ फिर अदालत में इस याचिका के साथ गया कि सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से बाजार के दर पर कार्यकाल खत्म होने के बाद आवास का किराया वसूला जाए। इसी आदेश के खिलाफ कोशियारी और बहुगुणा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
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