बुधवार, 7 अगस्त 2019

उच्च न्यायालय ने कोशियारी, बहुगुणा की याचिकायें खारिज की

देहरादून, सात अगस्त :भाषा: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने आज पूर्व मुख्यमंत्रियों भगत सिंह कोशियारी और विजय बहुगुणा की पुनर्विचार याचिकायें बुधवार को खारिज करते हुए राज्य सरकार को उनके पद छोडने के बाद भी लंबे समय तक अपने कब्जे में रखे गये सरकारी आवासों का किराया बाजार भाव के हिसाब से वसूलने का आदेश दिया है । याचिकायें खारिज करते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आर सी खुल्बे की खंडपीठ ने कहा कि पुनर्विचार का आधार वैधानिक रूप से टिकाउ नहीं है और इसमें कोई दम नहीं है । याचिकाकर्ता के वकील कार्तिकेय हरिगुप्ता ने कहा, 'पुनर्विचार कार्यवाही में लिया गया समय आदेश की तिथि :तीन मई, 2019: से छह माह की उस अवधि को प्रभावित नहीं करेगा जिस दौरान प्रतिवादियों को बाजार भाव के हिसाब से किराया अदा करने का निर्देश दिया गया था ।' देहरादून स्थित गैर सरकारी संगठन रूलक ने पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा पद छोड़ने के बाद भी सरकारी आवासों को अपने कब्जे में रखे जाने के एवज में उनसे किराया वसूले जाने के लिये उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है । दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने न्यायालय के समक्ष दलील दी थी कि किराये की गणना किये जाने से पहले उन्हें सुना जाये । उनके तर्क को काटते हुए गुप्ता ने अदालत में कहा कि यह आधार बिल्कुल गलत और आधारहीन है क्योंकि महीनों चली सुनवाई में न केवल इनके वकीलों को सुना गया बल्कि उनसे विशेष रूप से यह पूछा भी गया कि किराये की गणना पर वह कोई जवाब दाखिल करना चाहते हैं । उन्होंने कहा कि उस समय किसी भी वकील ने किराये की राशि को लेकर कुछ नहीं कहा इसलिये अब पुनर्विचार याचिका में इसपर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता । विजय बहुगुणा की दलील यह थी कि वह बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश्, विधायक और सांसद रह चुके हैं और इसलिये उन्हें किया गया आवंटन अवैध नहीं है लेकिन अदालत ने इसे भी खारिज कर दिया और कहा कि पूर्व में की गयी सेवायें पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में महलनुमा बंगलों के आवंटन के लिये आधार नहीं हो सकती ।


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