मसूरीकेंद्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और स्टील मंत्री ने गुरुवार को लाल बहादुर शास्त्री नैशनल एकेडमी ऑफ ऐडमिनिस्ट्रेशन मसूरी में के वैश्विक परिदृश्य में की भूमिका और उसकी तैयारी जैसे विषय पर विश्व के अलग-अलग देशों से आए प्रतिनिधियों को संबोधित किया। नागरिक-सैन्य संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऊर्जा की सर्वसुलभ उपलब्धता को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की 'ऊर्जा न्याय' की अवधारणा चार बातों पर आधारित है। ये ऊर्जा की आपूर्ति, ऊर्जा की सक्षमता, ऊर्जा के विविध प्रकारों की पर्यावरण से अनुकूलता और ऊर्जा की सुरक्षा हैं। उन्होंने कहा कि इस अवधारणा से यह प्रयास किया जा रहा है कि उस व्यक्ति को भी उसके हिस्से की ऊर्जा उप्लब्ध हो सके, जो अब तक इससे वंचित था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सामाजिक बदलाव में ऊर्जा को सबसे अहम मानती है। यही वजह है कि बीते पांच सालों में ऊर्जा की जरूरत, उत्पादन और खर्च के बीच संतुलन बनाया गया जिससे ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति देखने को मिली। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला, सौभाग्य, गिव इट अप स्कीम के जरिए लोगों के जीवन स्तर में आए गुणवत्तापूर्ण बदलाव आया है। उज्ज्वला योजना विकासशील देशों के लिए वरदान प्रधान ने कहा कि भारत ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के जरिए सामाजिक बदलाव की नई कहानी लिखने में सफलता हासिल की है। बारिश में भीगे ईंधन से रोटी बनाने को मजबूर महिला को धुएं से मुक्ति दिलाना हो या गांवों में योजना के लाभार्थियों विशेष तौर पर महिलाओं के स्वास्थ्य में आए सकारात्मक बदलाव हों, हमने ये उपब्धियां सिर्फ सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं कीं, बल्कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के साथ गैर सरकारी संगठनों ने इसे जमीन पर सफल बनाने के लिए प्रयास किया। इससे विश्व के कई विकासशील देश इस मॉडल को अपनाने के इच्छुक हैं।
from Uttarakhand News in Hindi, Uttarakhand News, उत्तराखंड समाचार, उत्तराखंड खबरें| Navbharat Times https://ift.tt/2YU5peu
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें