नैनीताल केंद्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली ने कोर्ट की अवमानना करने पर भारतीय वन सेवा के चर्चित अफसर को जुर्माने के रूप में 25 हजार रुपये अदा किए हैं। कोर्ट ने निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन को अवमानना नोटिस जारी कर मामले में जवाब देने को कहा था। वन संरक्षक उत्तराखंड के पद पर हल्द्वानी एफटीआई मे तैनात आइएफएस संजीव ने कैट की कोर्ट में दो प्रार्थना पत्र दाखिल किए थे। एक में उन्होंने आरोप लगाया था कि द्वारा उनकी चरित्र पंजिका में किए गए जीरो अंकन मामले में दिया हलफनामा झूठा है। संजीव ने इस मामले में आपराधिक केस चलाने का आदेश पारित करने की प्रार्थना की थी। संजीव चतुर्वेदी ने एम्स पर लगाए थे आरोप दूसरे मामले में उन्होंने कहा था कि एम्स दिल्ली में घपलों को उजागर करने पर उन्हें निशाना बनाया गया। संजीव चतुर्वेदी के अनुसार, 2014 में उनके द्वारा एम्स में अनियमितता के 13 मामले पकड़े गए, जिसके बाद उन्हें एम्स से ही हटा दिया गया। कैट की कोर्ट ने दोनों मामलों में जवाब दाखिल करने के आदेश पारित किए। हाई कोर्ट ने पिछले साल संजीव की एसीआर में जीरो अंकन को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताते हुए केंद्र पर 25 हजार जुर्माना लगाया था। इस आदेश को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती भी दी। सुप्रीम कोर्ट ने न केवल हाई कोर्ट के आदेश को सही ठहराया बल्कि जुर्माना राशि को 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दिया। इसके बाद संजीव द्वारा 26 जून को हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। केंद्र सरकार ने जमा कर दिए हैं 25 हजार रुपये न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद एम्स निदेशक और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया था। अवमानना नोटिस जारी होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा जुर्माने की 25 हजार की रकम का चेक कोर्ट में जमा कर दिया। बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट में भी जुर्माने की रकम जमा की जा चुकी है।
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