सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

उत्तराखंड में 'जलप्रलय' के पीछे की पूरी बात, 2013 से कितना अलग था यह 'जलजला'

करन खुराना, चमोली उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार सुबह 10.30 बजे एक भीषण 'जलप्रलय' में लगभग 200 लोग लापता बताए गए हैं। इसके साथ ही तकरीबन दर्जन भर शव मिल चुके हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार चमोली जिले की नीति घाटी में तपोवन क्षेत्र में ऋषिगंगा और धौलगंगा का पानी एकदम से बढ़ गया, जिसकी वजह से बांध परियोजना के आस पास काम कर रहे सैकड़ों मजदूर मलबे में दब गए। इसमें खोजबीन जारी है। उत्तराखंड में आई आपदा पर नवभारत टाइम्स ऑनलाइन ने ग्राउंड जीरो से पड़ताल की। इसमें कुछ खास तथ्य सामने आए। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन ने वाडिया इंस्टिट्यूट के हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. संतोष से इस घटना को विस्तार से जानने के लिए संपर्क किया। उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्ट्या पता चला है कि शुक्रवार और शनिवार भारी बर्फबारी के कारण ऊपर की पहाड़ी चोटियों पर बर्फ जमा हो गई थी। रविवार को मौसम परिवर्तन होते ही बर्फ के ढेर खिसके और एवलॉन्च के रूप में नदी में आ गिरे। इसकी वजह से यह 'जलप्रलय' हुई। जोशीमठ पहुंच चुकी हैं टीमें डॉ. संतोष ने बताया कि उस स्थान पर झील का कोई स्रोत नहीं है, न ही कोई मौजूदगी। साथ ही डॉ संतोष से जब इस बारे में पूछा गया कि 2013 में आई केदारनाथ आपदा और इस आपदा में क्या अंतर है तो उन्होंने बताया कि केदारनाथ की आपदा मॉनसून में आई थी, जिस जगह से भीषण जल आया था उस स्थान पर झील थी लेकिन यह ठंड के दौरान आई हुई आपदा है। इस आपदा का मुख्य कारण भारी बर्फबारी और उस बर्फबारी का एवलांच में तब्दील होना ही माना जाएगा। डॉ. संतोष ने बताया कि दो टीमें रवाना हो चुकी हैं और जोशीमठ पहुंच चुकी हैं। दो से चार दिन में विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आएगी। चित्रों के माध्यम से पता चलेगी हकीकत उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक प्रफेसर एमपीएस बिष्ट से बात की, जिसमें उन्होंने बताया कि सैटलाइट से प्राप्त चित्रों के अनुसार एक महीना पहले तक ऊपर इस तरह की कोई भी झील नहीं थी जो कोई भीषण 'जलप्रलय' ला सके। हर एक महीने का डेटा हमारे पास होता है, पिछले महीने के डाटा में ऐसा कुछ नहीं सामने आया। हम लोग पिछले तीन चार दिन के चित्र निकलवा रहे हैं। ज्यादा प्रामाणिक बात हम चित्रों के माध्यम से ही बता पाएंगे।


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