गुरुवार, 11 फ़रवरी 2021

Chamoli Glacier Burst Update: ऋषिगंगा नदी में पानी बढ़ने से रुका रेस्क्यू ऑपरेशन, बाद में हुआ शुरू, बचाव दल ने किया ये काम

देहरादून उत्तराखंड के चमोली जिले में आई आपदा के बाद राहत और बचाव के काम में गुरुवार को अचानक से ब्रेक लग गया है। ऐसा ऋषिगंगा नदी के अचानक से जल स्तर बढ़ जाने के कारण हुआ। हालांकि बाद में तपोवन टनल में रेस्क्यू का काम फिर से शुरू कर दिया गया है। एनडीआरएफ कर्मियों ने बताया कि नदी का जल स्तर बढ़ने के बाद टीम को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था। सीमित टीमों के साथ ऑपरेशन को फिर से शुरू कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, तपोवन टनल में फंसे 25 से 35 लोगों को खोजने में गाद के कारण बचाव अभियान में आ रही दिक्कतों के बाद बचाव दलों ने बहुआयामी रणनीति अपनाई है। सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की ओर से लगातार चलाए जा रहे बचाव और तलाश अभियान में पांचवे दिन गुरुवार को सुरंग में फंसे लोगों को खोजने के लिए रिमोट सेंसिंग से लेकर ड्रिलिंग तक हर तकनीक अपनाई जा रही है। NTPC के प्रॉजेक्ट डायरेक्टर ने कही ये बात उधर, NTPC के प्रॉजेक्ट डायरेक्टर उज्जवल भट्टाचार्य ने बताया- हम 6 मीटर की दूरी तक पहुंच गए थे लेकिन तभी एहसास हुआ कि पानी वहां तक आ रहा है। अगर हम काम जारी रखते, तो समस्या हो सकती थी। क्योंकि पत्थर अस्थिर है। खनन में लगा एक्स्कवैटर गिर भी सकता था। इसलिए हमने ड्रिलिंग ऑपरेशन को फिलहाल के रोक दिया। ऋषिगंगा नदी में बढ़ा पानी गुरुवार को ऋषिगंगा नदी में पानी बढ़ जाने के कारण राहत और बचाव अभियान अस्थायी रूप से रुका गया था। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि निचले इलाकों को खाली करने के आदेश दिए गए हैं। ऋषिगंगा नदी में पानी का स्तर बढ़ रहा है। आस-पास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया जा रहा है। लोगों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें और घबराएं नहीं। बचाव में आ रही ये भी दिक्कत बचाव अभियान में लगे अधिकारियों ने बताया कि जिस सुरंग में लोगों के फंसे होने का अनुमान लगाया जा रहा है। वह दरअसल कई सुरंगों का एक जाल है जिसमें कई सुरंगें या तो 90 डिग्री पर नीचे मुड़ती हैं या फिर कोण बनाकर दायें और बायें चली जाती हैं। सुरंग की जियो मैपिंग कराई एसडीआरएफ के डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि सुरंग की जियो मैपिंग कराई गई थी। इससे हमें पता चल सके कि हमें क्या रणनीति अपनानी चाहिए। इसी क्रम में जियो मैपिंग के बाद ड्रिलिंग करने का फैसला लिया। अग्रवाल ने बतायाकि चूंकि हमारे पास समय कम है इसलिए हर उस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे सफलता मिलने की उम्मीद हो। ड्रिलिंग के अलावा खुदाई और गाद निकालने का काम भी जारी हेलीकॉप्टर के जरिए रिमोट सेंसिंग से अंदर के फोटो लिए गए, जबकि ड्रोन से भी अंदर का जायजा लेने का प्रयास किया गया। हालांकि, ड्रोन से कोई खास जानकारी नहीं मिल पाई। उत्तराखंड पुलिस के प्रवक्ता नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि ड्रिलिंग शुरू करने के अलावा पहले से की जा रही खुदाई और गाद निकालने का काम भी जारी है। फंसे लोगों को बचाने के लिए हर मुमकिन प्रयास पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि फंसे लोगों को बचाने के लिए हर मुमकिन प्रयास किये जा रहे हैं। ऋषिगंगा घाटी में पहाड़ से गिरी लाखों मीट्रिक टन बर्फ के कारण ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियों में अचानक आई बाढ़ से 13.2 मेगावाट ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना पूरी तरह तबाह हो गई थी जबकि बुरी तरह क्षतिग्रस्त 520 मेगावाट तपोवन-विष्णुगाड परियोजना की सुरंग में काम कर रहे लोग उसमें फंस गए। एक शव और मिला, मरने वालों की संख्या 35, 169 अभी लापता उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार को एक और शव मिलने से आपदा में मरने वालों की संख्या 35 हो गई जबकि 169 अन्य लोग अभी लापता हैं। चमोली की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने बताया कि जिले के गौचर क्षेत्र से एक और शव बरामद हुआ है जिसके साथ ही अब तक आपदा ग्रस्त क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों से 35 शव बरामद हो चुके हैं। इसके अलावा, 169 अन्य लोग अभी भी लापता हैं जिनमें तपोवन सुरंग में फंसे 25—35 लोग भी शामिल हैं।


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