चमोली उत्तराखंड के चमोली इलाके में हुई त्रासदी ( ) के बाद से ही राहत बचाव का काम जारी है। ग्लेशियर के टूट जाने से काफी कुछ तबाह हो गया है। वहीं चिपको आंदोलन के गवाह रहे रैणी गांव में भारी तबाही हुई है। जैसे-जैसे ऋषि गंगा पावर प्लांट साइट से मलबा हटाया जा रहा है, लोगों की चीख-पुकार बढ़ती जा रही है। अब तक बचावकर्मियों को 32 शव मिले हैं और यह आंकड़ा बढ़ने की आशंका है। मंगलवार को चार शव और एक शख्स के अवशेष मिले। आशंका है कि इलाके में एक बाढ़ और भी आ सकती है। इस वजजह से स्थानीय निवासी शेल्टर में रहने को मजबूर हैं। इसके अलावा चीन बॉर्डर के पास 13 गांवों को जोड़ने वाला पुल भी पूरी तरह नष्ट हो गया है। संपर्क टूटने से बढ़ी मुश्किलदरअसल जिस क्षेत्र में पानी की टंकी और आवासीय ब्लॉक था, वह पूरी तरह से चपेट में आया। एक पुल भी बह गया, जिससे चीन की सीमा तक 13 गांव को जोड़ने वाला सड़क मार्ग भी दुर्गम हो गया। बीती सोमवार रात राष्ट्रीय और राज्य आपदा राहत बलों और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कर्मियों ने जहां प्लांट स्थित था और 1970 के दशक में चिपको आंदोलन की शुरुआत वाले गांव रैणी के गेट से 100 मीटर का रास्ता साफ करने का काम किया गया। ' 70 के लगभग शव मिलने की आशंका' वहां मौजूद अधिकारी मेजर परशुराम ने के कहा कि 'हम बहुत तेजी से नहीं जा रहे हैं क्योंकि हमें लगता है कि यहां मलबे के नीचे लगभग 20-30 शव हो सकते हैं। हमारी शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, गेट पर 20-25 लोग थे, और वे सभी डूबे हुए थे। हम 30-35 शव खोजने की उम्मीद कर रहे हैं जहां दो तीन मंजिला आवासीय इमारतें खड़ी थीं। इस साइट पर कुल मौतों का अनुमान लगभग 70 के लगभग का है। 'जीवित लोगों के बचने की बहुत कम संभावना' NDRF के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, जीवित बचे लोगों को खोजने की बहुत कम संभावना है। एनडीआरएफ के डीआईजी मोहसिन शाहिदी ने कहा कि पानी और ऊंचाई पर स्थित गांवों तक पहुंचा, जबकि पावर प्लांट बहुत नीचे था। हमें नहीं लगता कि कोई भी व्यक्ति नीचे जीवित है। शवों को निकालने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं। वहीं बहुत सारे लोग अपने रिश्तेदारों की तलाश में भी आ रहे हैं। अस्थायी पुल से राहत सामग्री भेजने की योजना इस बीच एसडीआरएफ रैणी और रैणी पल्ली के गांवों के बीच एक जिपलाइन स्थापित कर रहा है, जो उस पुल के पार है जो नष्ट हो गया था। एसडीआरएफ अधिकारी नवनीत सिंह ने कहा कि यदि किसी को तत्काल राशन या दवा भेजने की आवश्यकता हो तो लाइन का उपयोग किया जा सकता है। आपात स्थिति होने पर हम ज़िपलाइन का उपयोग कर सकते हैं। रैणी पल्ली में एक राहत शिविर भी लगाया जा रहा है। ड्रोन की निगरानी से खतरे का लगाया जा रहा पता वहीं राज्य बल ड्रोन के माध्यम से निगरानी भी रख रहा है। 30 मिनट तक उड़ान भरने की क्षमता और रिकॉर्ड फुटेज के साथ ड्रोन को यह देखने के लिए ऊपर की ओर भेजा गया था कि क्या कोई झील बन रही है जिससे बचाव दल को खतरा हो सकता है। अधिकारियों ने कहा कि अभी तक इस तरह के खतरे का पता नहीं चला है। मंगलवार शाम तक बीआरओ के अधिकारियों ने स्थल पर कम से कम चार उत्खनन के साथ कई मीटर कीचड़ को साफ कर दिया था। मौके पर एक वरिष्ठ बीआरओ अधिकारी ने कहा कि हम रात में काम करना जारी रखेंगे। गांवों को फिर से जोड़ना की हमारी प्राथमिकता है। हम अस्थायी पुल सहित ऐसा करने के विभिन्न तरीकों को आजमा कर देख रहे हैं।
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