मंगलवार, 9 फ़रवरी 2021

Uttarakhand Tragedy: उत्तराखंड त्रासदी पर केंद्रीय मंत्री आरके सिंह का बयान, 'पहाड़ों पर पावर प्रॉजेक्ट जरूरी, बैराज की वजह से बचे गांव'

चमोली उत्तराखंड के चमोली में आए सैलाब में कई जिंदगियां अभी भी फंसी हैं जिन्हें बचाने की जंग जारी है। अब तक 29 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं। जहां कई पर्यावरण वैज्ञानिक इस प्राकृतिक आपदा के पीछे पहाड़ों और नदियों के लगातार दोहन को वजह मान रहे हैं वहीं केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि बैराज और बांधों की वजह से डाउनस्ट्रीम में स्थित कई गांव बच गए। एक न्यूज चैनल से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बैराज की वजह से एनटीपीसी प्रॉजेक्ट बच गया और कई गांव भी बच गए। वरना सैलाब की तीव्रता बहुत ज्यादा था और काफी नुकसान हो सकता था। पढ़ें: तपोवन बैराज की वजह से बचा NTPC प्रॉजेक्ट केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा, 'अभी भी वहां काफी बर्फ जमा है। तीन-चार दिन तक वहां बहुत भारी बर्फबारी हुई थी और ऐसा लग रहा है कि वहां कोई डेलिकेट पॉइंट था जिसमें बोल्डर या पहाड़ का कोई टुकड़ा गिरा जिससे सैलाब आया।' आरके सिंह ने बताया कि 'पहला प्रोजेक्ट ऋषिगंगा हाइड्रोपावर जो साढ़े 13 मेगावाट का था, वह पूरी तरह बह गया। इसके बाद सैलाब नीचे की ओर आना शुरू हुआ और ड्राउनस्ट्रीम पर बने एनटीपीसी प्रॉजेक्ट को भी हिट किया लेकिन तपोवन बैराज की वजह से यह प्रोजेक्ट बच गया। कई सारे गांव भी इसकी चपेट में आने से बच गए।' 'सारे प्रॉजेक्ट पर्यावरण अध्ययन के बाद बनाए गए' आरके सिंह पहाड़ी इलाकों में पावर प्रॉजेक्ट को जरूरी मानते हैं। उन्होंने कहा, 'ये प्रॉजेक्ट जरूरी हैं। इनके चलते डाउनस्ट्रीम में उतना नुकसान नहीं हुआ। टिहरी बांध की वजह से हरिद्वार वगैरह भी सुरक्षित है। ये सभी प्रॉजेक्ट पर्यावरण अध्ययन करके ही बनाए गए हैं।' आरके सिंह आगे कहते हैं कि 'हालांकि लेकिन एक चीज होनी चाहिए। अर्ली वार्निंग सिस्टम जरूरी है। उससे हमारे वर्कर्स को मदद मिलेगी। हमने अपने अधिकारियों से कहा है कि अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए गए हैं जिससे ग्लेशियर और हिमस्खलन के लिए हमें पहले से अलर्ट मिलते रहें।'


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