शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

Uttarakhand Floods : काली देवी की छाया, हाइडल प्रोजेक्ट पर मालिक की मौत .. समझिए ऋषिगंगा का तिलिस्म

शिवानी आजाद, देहरादून लुधियाना के व्यवसायी राकेश मेहरा 15 अगस्त, 2011 का इंतजार कर रहे थे। यह दिन उनके लिए खास था क्योंकि गढ़वाल हिमालय में उनके द्वारा खरीदे गए जलविद्युत संयंत्र की एक इकाई का ट्रायल शुरू होना था। ऋषिगंगा नदी पर 13.2 मेगावाट का संयंत्र आखिरकार लगभग छह साल बाद पूरा होने वाला था। लेकिन उद्घाटन से पहले परियोजना स्थल के ऊपर पहाड़ों से एक बड़ा बोल्डर आकर राकेश मेहरा के सिर पर गिरा और उनकी मौत हो गई। हालांकि इस घटना में कोई और प्रभावित नहीं हुआ। ग्रामीणों ने तब इस घटना को दैवीय चेतावनी करार दिया था और कहा था कि नदी के प्रवाह में बाधा नहीं होनी चाहिए। लोगों का दावा था नदी के प्रवाह में बाधा बनने में यह देवी का बुरा संकेत था। बार-बार क्यों बर्बाद हो रहा प्रॉजेक्ट? ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना, जो इसी महीने 7 फरवरी को बाढ़ की चपेट में आई, शुरू से ही समस्याओं से त्रस्त रही है। यह परियोजना कई वर्षों तक बंद रही। 2005 में इसे राकेश मेहरा ने खरीदा था, जो परियोजना स्थल पर मारे गए। इसके बाद 2008, 2010, 2013 और 2016 में बार-बार बाढ़ और झटके आए। 2016 में यह प्रॉजेक्ट पूरी तरह से बह गया। 'दिखा रहीं नाराजगी' स्थानीय निवासियों का मानना है कि काली देवी, जिनकी वे लोग पूजा करते हैं, इन आपदाओं के जरिए वह अपनी नाराजगी दिखा रही हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि दुर्घटनाएं और कुछ नहीं बल्कि बार-बार की चेतावनी है। 1970 में पेड़ों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन में अग्रदूत रहीं गौरा देवी के बेटे सोहन सिंह राणा ने बताया, 'जब 1998 में बाहरी लोगों द्वारा जलविद्युत संयंत्र के लिए जमीन खरीदी गई थी, तब मैं नौवीं कक्षा में पढ़ रहा था। तब से हमने एक के बाद एक आपदा देखी है। आज स्थिति ऐसी है कि हमारे गांव के लोग रैनी गांव में रात को रुकने से डरते हैं।' 'प्रकृति के साथ छेड़खानी से नाराज देवी' 70 वर्षीय कलावती देवी ने कहा, 'इस भूमि को खनन, पेड़ काटने और पहाड़ों पर विस्फोट करके स्थान परिवर्तित किया जा रहा है। ये सभी प्राकृतिक आपदाएं इसी सबका परिणाम हैं।' स्थानीय लोगों का यह भी मानना है कि काली देवी, जिसकी वे पूजा करते हैं, इन आपदाओं के माध्यम से अपनी नाराजगी दिखा रही है। 'बार-बार संकेत दे रहीं काली मां' रैणी गांव के दिनेश चंद्रा ने कहा कि हमारी देवी काली, जो घाटी की रक्षा करती हैं, हमें बार-बार संकेत भेज रही हैं। मां प्रकृति के साथ छेड़खानी करने से खुश नहीं हैं।


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