बुधवार, 10 फ़रवरी 2021

Uttarakhand Flood: हैंगिग ग्लेशियर बना जलप्रलय की वजह! रात ग्लेशियर टूटा, झील बनी, सुबह मच गई तबाही

देहरादून सात फरवरी की सुबह चमोली में ऋषिगंगा कैचमेंट क्षेत्र में आए जलप्रलय का कारण रौंथी पर्वत का एक हैंगिंग ग्लेशियर था। इस बात की पुष्टि खुद उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के निदेशक डॉ. एमपीएस बिष्ट ने की है। उन्होंने यह विश्लेषण राज्य के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी भेज दिया है। इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए उन्होंने सैन फ्रांसिस्को की एजेंसी 'प्लेनेट' के सैटलाइट डेटा का सहारा लिया। नई जानकारी सामने आने के बाद सरकार की ओर से यूसैक को रौंथी पर्वत पर सैटलाइट के माध्यम से निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। 82 से 85 डिग्री के कोण पर नीचे की ओर लटका था ग्लेशियर असल में ऋषिगंगा नदी के बायीं छोर पर रौंथी गदेरा मिलता है, जो रौंथी पर्वत से आता है और इसका स्रोत रौंथी ग्लेशियर ही है। इस पर्वत पर करीब 5,600 मीटर की ऊंचाई पर करीब आधा किलोमीटर लंबा हैंगिंग ग्लेशियर था। इसे सर्प ग्लेशियर भी कहते हैं। यह एक चट्टान पर स्थित था और 82 से 85 डिग्री का कोण लेकर नीचे की तरफ लटका हुआ था। छह फरवरी की रात को हैंगिंग ग्लेशियर वाली भारी-भरकम चट्टान नीचे खिसक गई और उसके साथ ग्लेशियर का अधिकांश हिस्सा भी नीचे आ गिरा। रौंथी गदेरे से भारी मात्रा में मलबा लेकर यह ग्लेशियर और बोल्डर करीब 11 किलोमीटर की दूरी तय कर 3800 मीटर की ऊंचाई पर ऋषिगंगा नदी में जा गिरे। यहां पर बर्फ और मलबा जमा हो गया और एक कृत्रिम झील का निर्माण हो गया। सात फरवरी की सुबह भारी दबाव के चलते यह झील टूट गई और मलबे सहित निचले क्षेत्रों में तबाही बरपाते हुए आगे बढ़ने लगी। टूटने ही हुआ कंपन, आसपास के इलाके की और बर्फ आ गिरी यूसैक के आकलन के मुताबिक, रौंथी पर्वत की चट्टान टूटने के साथ गिरे हैंगिंग ग्लेशियर से क्षेत्र में भारी कंपन हुआ। इसके चलते रौंथी गदेरे के दोनों छोर पर जो ताजा बर्फ जमी थी, वह भी नीचे खिसकी और ऋषिगंगा में जा मिली। इससे नदी में बड़े बोल्डर के साथ अतिरिक्त पानी आ गया था। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की पांच वैज्ञानिकों की एक टीम ने मंगलवार को आपदाग्रस्त क्षेत्रों का जमीनी सर्वे करने के साथ हवाई सर्वे भी किया। टीम में शामिल विज्ञानी डॉ. समीर तिवारी, डॉ. मनीष मेहता आदि ने सर्वे के बाद इस बात की पुष्टि की है कि जलप्रलय का कारण रौंथी पर्वत का हैंगिंग ग्लेशियर ही बना है। उन्होंने बताया कि आधा किलोमीटर तक लंबाई के साथ ही इसकी मोटाई करीब 50 मीटर थी। अध्ययन के लिए इस क्षेत्र में ग्लेसियोलॉजिस्ट और हाइड्रोलॉजिस्ट दोनों गए हैं जो सभी संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं कि आखिर ऐसी आपदा आई कैसे। उनके अनुसार, जल्द कुछ और प्रमाण भी खोजे जाएंगे। इससे पहले इसरो के भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस) ने एवलांच को जलप्रलय की वजह बताया था। हालांकि, उस जानकारी में स्पष्ट नहीं किया गया था कि किस ग्लेशियर से यह एवलांच हुआ है।


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