देहरादून/चमोली कुदरत का कहर कई बार हमें कुछ चौंकाने वाले संकेत भी देता है। उत्तराखंड में आई आपदा (Uttarakhand Floods) के बीच ऐसी ही एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। जरा सोचिए कि क्या यह संभव है कि किसी का शव सौ किलोमीटर से ज्यादा बहते हुए उसी घाट पर पहुंच जाए, जहां पूर्वजों का अंतिम संस्कार हुआ करता था। जी हां, यह सच है। आपदा का शिकार हुए एक हेड कॉन्स्टेबल का शव कर्णप्रयाग (Karnprayag) में अपने पूर्वजों के घाट पर ही मिला है। रविवार यानी 7 फरवरी को ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट की साइट पर आई जलप्रलय में सैकड़ों लोग लापता हो गए। 42 साल के हेड कॉन्स्टेबल मनोज चौधरी भी उन बदकिस्मत लोगों में से एक थे। एक दिन बाद उनका शव अलकनंदा और पिंडर नदी के संगम पर स्थित कर्णप्रयाग के घाट पर मिला। इसी जगह पर उनका पैतृक गांव भी है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जिस घाट पर मनोज का शव मिला, वह उनके पुश्तैनी गांव के बेहद करीब है। हेड कॉन्स्टेबल मनोज का राजकीय सम्मान के साथ इसी घाट पर दाह संस्कार हुआ। मनोज के बड़े भाई अनिल चौधरी ने अंग्रेजी अखबार को बताया, 'यह वही घाट है जहां हमारे सभी पूर्वजों को दफनाया जाता रहा है। यह हमारे पुश्तैनी गांव कनौड़ी से बहुत करीब है।' हेड कॉन्स्टेबल मनोज के भाई ने अंग्रेजी अखबार से बाततीच में कहा, 'इत्तेफाक है मगर ये तो ऊपर वाले की कृपा रही कि उनकी डेड बॉडी अपने पूर्वजों के घाट पर पहुंचकर रुक गई।' बताते चलें कि ऋषिगंगा नदी धौलीगंगा से मिलती है और नीचे आकर उसका अलकनंदा नदी से संगम होता है। हेड कॉन्स्टेबल मनोज चौधरी ने 20 साल पहले यूपी पुलिस जॉइन किया था। 2000 में जब यूपी और उत्तराखंड का विभाजन हुआ तो उन्होंने अपने गृहराज्य को चुना। जनवरी के मध्य तक वह गोपेश्वर पुलिस लाइंस में तैनात थे। ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट साइट पर जलप्रलय आने से 15 दिन पहले ही उन्हें तैनात किया गया था। अनिल को अब छोटे भाई की पत्नी सीमा को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी की उम्मीद कर रहे हैं। अनिल ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 'मुझे पुलिस ने फोन किया कि मनोज और एक दूसरे पुलिसकर्मी ऋषिगंगा साइट से लापता हैं। मैं तुरंत मौके पर पहुंचा तो उनके सहकर्मियों ने बताया कि वह सैलाब में बह गए। मैं घर लौट रहा था, तभी मुझे कर्णप्रयाग से मिली चार डेड बॉडी की तस्वीरें मिलीं। मनोज भी उनमें से एक थे।' घटना के बारे में देहरादून के कॉन्स्टेबल सुरेश भंडारी ने बताया कि मनोज और दो अन्य कॉन्स्टेबल (कॉन्स्टेबल बलबीर सिंह गारिया और कॉन्स्टेबल दीपराज) के साथ वह ड्यूटी पर थे। भंडारी के मुताबिक दीपराज और वह मेन गेट पर थे, जबकि मनोज और बलबीर कमरे में थे। सुरेश भंडारी ने अंग्रेजी अखबार को बताया, 'मैंने रैणी गांव से शोर सुना और कुछ ही सेकंड में कीचड़ का गुबार हमारे सामने था। दीपराज और मैंने रोड की तरफ भागना शुरू किया। मैंने बलबीर और मनोज को बुलाने की कोशिश की लेकिन वे शायद तब तक फंस चुके थे।' चमोली में जलप्रलय के बाद चिपको आंदोलन के गवाह रहे रैणी गांव में भारी तबाही हुई है। जैसे-जैसे ऋषि गंगा पावर प्लांट साइट से मलबा हटाया जा रहा है, लोगों की चीख-पुकार बढ़ती जा रही है। मंगलवार को चार शव और एक शख्स के अवशेष मिले। आशंका है कि इलाके में एक बाढ़ और भी आ सकती है। इस वजह से स्थानीय निवासी शेल्टर में रहने को मजबूर हैं। इसके अलावा चीन बॉर्डर के पास 13 गांवों को जोड़ने वाला पुल भी पूरी तरह नष्ट हो गया है।
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