करन खुराना, हरिद्वार समय बीतने के साथ कुंभ की तैयारियां भी जोड़ पकड़ रही हैं। गुरुवार को बैरागी कैम्प में मेलाधिकारी और साधु संतों की मौजूदगी में धर्मध्वजा की लकड़ियां मौके पर पहुंचीं।कुंभ स्नान के दौरान धर्मध्वजा स्थापित होना एक परंपरा है। धर्मध्वजा का स्थापित होना ही कुंभ की शुरुआत मानी जाती है। कोविड कारणों से भले ही कुंभ स्नान में देरी हो रही हो, लेकिन कुंभ की शुरुआत धर्म ध्वजा के स्थापना से ही मानी जाती है। आपको बता दें कि कुछ दिन पूर्व साधु संत, मेलाधिकारी दीपक रावत के साथ छिद्दरवाला जंगल पहुंचे थे, जहां ध्वजा के लिए लकड़ियों का चयन किया गया और गुरुवार को अखाड़े के अनुसार लकड़ियां बैरागी कैम्प पहुंचीं। मान्यता के अनुसार 52 गज की लकड़ी को ध्वजा के रूप में स्थापित किया जाता है। 25 फरवरी को निकलेगी शोभा यात्रा गौरतलब है कि 25 फरवरी को गंगा सभा के द्वारा धर्मध्वजा के साथ कुशाघाट से हर की पौड़ी तक शोभायात्रा निकाली जाएगी और उसी के साथ हर की पौड़ी के प्रांगण में धर्मध्वजा स्थापित की जाएगी। इसके बाद 3 मार्च को जूना अखाड़े में धर्मध्वजा स्थापित की जाएगी। अन्य अखाड़ों ने भी ध्वजा स्थापित करने की तिथियां घोषित कर चुके हैं। गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा,महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने मेलाधिकारी दीपक रावत से मुलाकात कर उनको इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया। मेलाधिकारी दीपक रावत ने सहर्ष आमंत्रण स्वीकर किया।
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