पुलकित शुक्ला, हरिद्वारब्यूटी प्रॉडक्ट बनाने वाली जानी-मानी कंपनी में एक फर्जीवाड़ा सामने आया है। कंपनी के हरिद्वार प्लांट में लाखों लीटर लाइसेंस मिलने से पहले ही बनाकर सप्लाई कर दिया गया। आबकारी विभाग की कार्रवाई में मौके से लगभग 1 लाख लीटर सैनिटाइजर जब्त कर लिया गया है और आबकारी ऐक्ट के तहत प्लांट हेड को भी गिरफ्तार कर लिया है। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए हैंड सैनिटाइजर की मांग बहुत बढ़ गई है। ऐसे में कई कंपनियों ने सैनिटाइजर का उत्पादन बढ़ा दिया है। जो कंपनियां सैनिटाइजर नहीं बनाती थीं उन्होंने भी सैनिटाइजर का उत्पादन शुरू कर दिया है। ऐसे में ब्यूटी प्रॉडक्ट बनाने वाली जानी मानी कंपनी VLCC ने भी हरिद्वार प्लांट से सैनिटाइजर बनाने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन किया। हालांकि लाइसेंस मिलने से पहले ही 7 लाख लीटर सैनिटाइजर बनाकर ना सिर्फ तैयार कर लिया बल्कि 6 लाख लीटर सैनिटाइजर सप्लाई भी कर दिया। आबकारी विभाग के आलाधिकारियों को सूचना मिलने पर आबकारी की टीम ने तीन दिन पहले कंपनी में छापेमारी की। रात भर चली छापेमारी में आबकारी की टीम ने लगभग 1 लाख लीटर सैनिटाइजर जब्त कर लिया। साथ ही VLCC हरिद्वार के प्लांट हेड अशोक राजपूत को आबकारी ऐक्ट के तहत गिरफ्तार भी कर लिया। आबकारी निरीक्षक लक्ष्मण सिंह बिष्ट ने बताया कि आरोपी प्लांट हेड को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। अधिकारियों की भूमिका पर सवालपूरे मामले में आबकारी विभाग के अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है। कंपनी को लाइसेंस 8 जून को मिला जबकि सैनिटाइजर का उत्पादन अप्रैल में ही शुरू कर दिया गया था। सैनिटाइजर बनाने के लिए भारी मात्रा में स्प्रिट मुम्बई, दिल्ली और गाजियाबाद से मंगवाया गया। इतना ही नहीं लगभग 6 लाख लीटर सैनिटाइजर बनाकर कंपनी ने सप्लाई भी कर दिया। भारी मात्रा में ये अवैध एल्कोहल युक्त सामग्री आखिर किसकी सहायता से इधर से उधर हो रही थी, यह बड़ा सवाल है।
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