मंगलवार, 3 सितंबर 2019

सभी अभियुक्तों को अदालत में बचाव का अधिकार : उच्च न्यायालय

देहरादून, तीन सितंबर :भाषा: अदालत में अपने बचाव को सभी अभियुक्तों का संवैधानिक अधिकार बताते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को किसी अभियुक्त का मुकदमा लड़ने से किसी वकील को रोकने को लेकर राज्य की बार एसोसिएशनों द्वारा कोई प्रस्ताव पारित किए जाने पर रोक लगा दी। उच्च न्यायालय का यह आदेश एक जनहित याचिका पर आया है जिसमें कोटद्वार बार एसोसिएशन द्वारा कुछ माह पहले पारित इस प्रकार के एक प्रस्ताव को चुनौती दी गयी थी । याचिकाकर्ता के वकील कार्तिकेय हरिगुप्ता ने बताया कि बार एसोसिएशन ने प्रस्ताव पारित कर अपने सदस्यों को एक वकील की हत्या के आरोपी का मुकदमा लड़ने से मना कर दिया था । अपनी पसंद के वकील के जरिये अदालत में बचाव को सभी अभियुक्तों का संवैधानिक अधिकार बताते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने कोटद्वार बार एसोसिएशन को याचिकाकर्ता कुलदीप अग्रवाल को 25,000 रुपये देने का निर्देश दिया । अग्रवाल से एक वकील की हत्या के आरोपी विनोद कुमार ने अदालत में अपना मुकदमा लड़ने के लिए संपर्क किया था । अग्रवाल के कुमार का मुकदमा लड़ने के लिये राजी होने के बाद कोटद्वार बार एसोसिएशन ने एक संकल्प पारित किया और अपने सदस्यों पर अपने साथी वकील की हत्या के आरोपी का मुकदमा लड़ने पर रोक लगा दी। खंडपीठ ने यह भी कहा कि उत्तराखंड बार काउंसिल के पास अपने मुवक्किल का मुकदमा लड़ने से किसी वकील को रोकने के लिए ऐसे 'गैर कानूनी' प्रस्ताव पारित करने वाली प्रदेश की किसी भी बार एसोसिएशन के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार है । खंडपीठ ने अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश को यह निर्देश दिया कि कोटद्वार बार एसोसिएशन द्वारा किसी भी प्रकार से अदालती कार्यवाही में बाधा डाले जाने पर वह उससे सख्ती से निपटें । अदालत ने कहा कि पौड़ी गढ़वाल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अदालत परिसर में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि अदालती कार्रवाई निर्बाध रूप से चले । इससे पहले, जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा था, ‘‘अगर कोई यहां आकर मुझे अदालत में गोली मार दे तो भी आप अभियुक्त को एक निष्पक्ष बचाव के मौके से वंचित नहीं कर सकते ।’’ उन्होंने कहा था कि यहां तक कि पाकिस्तान के आतंकवादी अजमल कसाब को भी बचाव के लिए एक वकील दिया गया था और एक निष्पक्ष मुकदमा लड़ा गया ।


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