शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

लिखी जा रही है आयुष्मान घोटाले की देश की सबसे बड़ी एफआईआर

देहरादून उत्तराखंड के ऊधमसिंहनगर जिले की काशीपुर कोतवाली में पहली बार देश की सबसे बड़ी एफआईआर लिखी जा रही है। यह एफआईआर राज्य में चल रहे में किए गए घोटाले की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट लिखते-लिखते चार-पांच दिन गुजर चुके हैं। इसे पूरा लिखने में एक-दो दिन का समय और लग सकता है। उत्तराखंड अटल आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के ऐग्जिक्यूटिव असिस्टेंट धनेश चंद्र की तरफ से काशीपुर के दो अस्पताल संचालकों के खिलाफ पुलिस को तहरीर सौंपी गईं है। यह तहरीरें एसएसपी कार्यालय के माध्यम से एक हफ्ते पहले कोतवाली कार्यालय में पहुंच चुकी है। इसमें से एक तहरीर 64 पृष्ठ की हैं, तो दूसरी तहरीर करीब 24 पृष्ठों की। तहरीरों में अधिक विवरण होने के कारण इन अस्पताल संचालकों के खिलाफ ऑनलाइन एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती। अटल आयुष्मान घोटाले में काशीपुर के दो अस्पतालों के खिलाफ दर्ज की जा रही एफआईआर काशीपुर पुलिस के लिए सिरदर्द बनी हुई है। हिंदी और अंग्रेजी भाषा की भेजी गई दोनों एफआईआर लिखने में थाने के मुहर्रिरों के पसीने छूट रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अटल आयुष्मान योजना के तहत रामनगर रोड स्थित एमपी अस्पताल और तहसील रोड स्थित देवकीनंदन अस्पताल में भारी अनियमितताएं पकड़ी थीं। ये अनियमितताएं अटल आयुष्मान योजना के लिए प्रयोग में लाये जाने वाले भारत सरकार के सॉफ्टवेयर के द्वारा पकड़ में आई थी। इसके पकड़ में आने के बाद हुई जांच में दोनों अस्पतालों के संचालकों की तरफ से नियम विरुद्ध रोगियों के फर्जी उपचार बिलों का क्लेम वसूलने का मामला पकड़ में आया था। एमपी अस्पताल में रोगियों के डिस्चार्ज होने के बाद भी मरीज कई-कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती दिखाए गए। आईसीयू में भी क्षमता से अधिक रोगियों का उपचार दर्शाया गया। डायलिसिस केस एमबीबीएस डॉक्टर की ओर से किया जाना बताया गया और वो भी अस्पताल की क्षमता से कई गुना ज्यादा। जांच कई तथ्यों के अनुसार कई प्रकरणों में बिना इलाज किए ही क्लेम प्राप्त कर लिया गया, जिसकी मरीज को भनक तक नहीं है। काशीपुर कोतवाली में एफआईआर दर्ज करने वाले सॉफ्टवेयर की क्षमता दस हजार शब्दों से अधिक नहीं है। इस कारण इसे दर्ज करने में पुलिस को परेशान होना पड़ रहा है।


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