देहरादून उत्तराखंड के रेलवे स्टेशनों पर लगे साइन बोर्डों से उर्दू भाषा को हटाकर संस्कृत का इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। हालांकि उर्दू हटाए जाने पर रेलवे ने स्पष्टीकरण जारी किया है। रेलवे ने कहा कि मौजूदा भाषाओं के साथ ही संस्कृत को अतिरिक्त भाषा के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। रेलवे ने साफ किया है कि उर्दू को हटाया नहीं जाएगा। ने स्पष्ट किया करते हुए कहा, 'किसी भी स्टेशन से न तो उर्दू भाषा को हटाया है और न ही ऐसा करने का कोई इरादा है। संस्कृत भाषा को रेलवे स्टेशनों पर लगे साइन-बोर्डों पर एक अतिरिक्त भाषा के रूप में लिखा जा सकता है लेकिन इसे उर्दू भाषा को हटाकर नहीं लिखा जाएगा।' 'उर्दू भाषा को नहीं हटाया जाएगा' रेल मंत्री पीयूष गोयल ने राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि गृह मंत्रालय की तरफ से जारी साइनबोर्ड में इस्तेमाल भाषा में बदलाव नहीं हुआ है उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि 'साइन बोर्ड में उर्दू भाषा को बदला नहीं गया है।' 'हरिद्वार सहित कुछ स्टेशनों पर संस्कृत साइनबोर्ड' भारतीय रेलवे ने पहाड़ी राज्य में जितने भी स्टेशन हैं, वहां मौजूद साइनबोर्ड पर उर्दू हटाकर संस्कृत यूज किए जाने की रिपोर्ट का खंडन किया। भविष्य में ऐसा किए जाने का कोई इरादा भी नहीं है। हालांकि रेलवे के इस दावे के इतर हरिद्वार जैसे कुछ स्टेशनों पर साइनबोर्ड पर संस्कृत लिखे जाने का मामला सामने आया है।
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