प्रदेश के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग ने बताया कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।
अल्मोड़ा और बागेश्वर जिलों में पड़ने वाले बिनसर अभयारण्य की सीमा के चारों तरफ तीन किलोमीटर की दूरी तक पारिस्थितिकी संवेदी क्षेत्र घोषित किया गया है।
अभयारण्य में विभिन्न मूल्यवान हिमालयी जड़ी बूटियां एवं पादप जैसे वन तुलसी, थुनेर, तेजपात और सफेद मुसली पाई जाती हैं। इसके अलावा, यहां जंगली जानवर जैसे भालू, तेंदुआ और साही भी बहुतायत में हैं।
सुहाग ने कहा कि पारिस्थितिकी संवेदी जोन घोषित होने से इस क्षेत्र के वन संरक्षण में मदद मिलेगी।
करीब 76.01 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले पारिस्थितिकी संवेदी क्षेत्र में अब प्रदूषण वाले उद्योगों को नहीं लगाया जा सकेगा और न ही पहले से मौजूद ऐसे उद्योगों को विस्तार की अनुमति होगी। इसके अलावा, स्थानीय निवासियों की मकान निर्माण या मरम्मत आदि घरेलू जरूरतों के लिए जमीन की खुदाई के अतिरिक्त अन्य सभी प्रकार की खनन गतिविधियां प्रतिबंधित होंगी।
इस क्षेत्र में बडी जलविद्युत परियोजनाएं भी नहीं लगाई जा सकेंगी। नयी आरा मिलों और ईंट भट्टों की स्थापना पर भी प्रतिबंध रहेगा।
हालांकि, पारिस्थितिकी क्षेत्र में 20 गांव भी आ रहे हैं और माना जा रहा है कि इससे भविष्य में विकास के मुद्दों और वन संरक्षण के प्रयासों में टकराव हो सकता है।
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