रिजर्व की उप निदेशक कल्याणी नेगी ने बताया कि रिजर्व के कोर एरिया में भी जगह-जगह वन मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए दो ऑल टेरेन व्हीकल्स, 14 पालतू हाथियों और ड्रोन कैमरे का उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बिजरानी व गर्जिया पर्यटन ज़ोन में 101.57 किलोमीटर वन मार्ग में से करीब 87.57 किलोमीटर ऐसे वन मार्ग भी भारी बारिश में बह गए जिनको आगामी पर्यटन सत्र 2021-22 के लिए 15 अक्टूबर तक तैयार किया गया था।
वर्तमान में रिजर्व की ढेला व झिरना रेंज में पर्यटन चल रहा है लेकिन गर्जिया व बिजरानी पर्यटन जोन को मार्ग बह जाने के कारण उसे पर्यटकों के लिए बंद रखा गया है।
रिजर्व की दक्षिणी सीमा से लगे संवेदनशील वन क्षेत्र पर पालतू हाथियों और ड्रोन कैमरों की मदद से विशेष निगरानी की जा रही है। साथ में कालागढ़, सोना नदी, कान्द्रू, चूही सोत, पटेर पानी, जमना गवाड, गौज पानी से मछिया खाल व धारा सोत तक एवं जमुना गवाड़ से सुंठा खाल तो दूसरी तरफ झिरना जाली के जंगल पर सतत निगरानी की जा रही है।
हर साल 14 नवंबर तक बिजरानी, गर्जिया, सुल्तान, ग़ैरल, सर्पदुली व ढिकाला सहित दुर्गा देवी तक कॉर्बेट के सभी पर्यटन जोन सैलानियों के लिए खोल दिए जाते हैं।
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