हालांकि, पुलिस सूत्रों ने बताया कि रूड़की के सोलानीपुर में रविवार को हुई इस घटना के संबंध में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
सूत्रों ने बताया कि पुलिस की टीमें अलग—अलग जगहों पर आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है।
इस बीच, दूसरे पक्ष की तरफ से भी पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया गया है कि गिरिजाघर में लोगों को धन और नौकरी का लालच देकर जबरन धर्मांतरण कराया जा रहा था और इसके लिए राजी नहीं होने वालों के साथ गाली गलौज की गई।
हालांकि, अशोक कुमार ने स्पष्ट किया कि हमला, तोड़-फोड़ और मारपीट की घटनाएं किसी भी स्थिति में 'स्वीकार्य' नहीं हैं और उन्होंने अधिकारियों को इस प्रकार की हिंसक गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन्होंने हमला और तोड़-फोड़ की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। प्रदेश में इस प्रकार की घटनाएं किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।’’
कुमार ने बताया कि गिरिजाघर और आसपास के इलाकों में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात है और वहां मुस्तैदी से गश्त की जा रही है।
इस बीच, उत्तराखंड सरकार ने एक अधिसूचना जारी करते हुए राज्य में हिंसा की घटनाओं की आशंका को देखते हुए सभी 13 जिलों के जिलाधिकारियों को अक्टूबर से दिसंबर 2021 तक तीन माह के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के उपयोग का अधिकार दे दिया है।
रविवार को रूड़की के सोलानीपुर में स्थित एक गिरिजाघर पर उपद्रवियों ने हमला कर वहां तोड़-फोड़ की थी। उन्होंने गिरिजाघर में रखे गमले तोड़ दिए और वहां लगे पंखों तथा फर्नीचर को भी नुकसान पहुंचाया तथा वहां मौजूद लोगों के विरोध करने पर उनके साथ मारपीट भी की।
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