देहरादून उत्तराखंड के चमोली जिले में आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। आधिकारिक तौर पर इस त्रासदी में 15 लोगों के मरने की बात कही जा रही है। सोमवार को राज्य के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 200 लोगों के लापता होने की आशंका जताई है। ऐसे में तपोवन के हाइड्रोपावर प्रॉजेक्ट की सुरंगों में फंसे मजदूरों की सांस अधर में लटकी है। यहां दो सुरंगे हैं। इन सुरंगों में से 30 से 35 मजदूरों को बाहर निकाला जा चुका है। इन दो सुरंगों में से छोटी सुरंग में से तो लगभग सभी मजदूर बाहर आ चुके हैं। लेकिन बड़ी सुरंग में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में ही असली समस्या सामने आ रही है। दूसरी सुरंग है ढाई किलोमीटर लंबीयह बड़ी सुरंग करीब ढाई किलोमीटर लंबी है। चूंकि सिल्ट की वजह से इन सुरंगों के मुहाने तक पहुंच पाना मुश्किल है इसलिए यहां बचावकर्मी रस्सियों के सहारे ही इनके अंदर पहुंच पा रहे हैं। इस बड़ी सुरंग में इसी वजह से मशीनों की मदद से भरी हुई गाद या सिल्ट की सफाई नहीं हो पा रही है। इसमें फंसे मजदूरों के पास ज्यादा समय नहींइस सुरंग में फंसे मजदूर किस हालत में होंगे इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के कर्मियों ने जिस तरह से सुरंग से एक-एक करके कई मजदूरों को बाहर निकाला है उससे साफ पता चलता है कि अभी भी जो मजदूर फंसे हैं उनके पास बहुत समय नहीं है। अगले 24 घंटे अहम साबित हो सकते हैं हालांकि, बचाव कार्य के लिए थलसेना (200 जवान), एनडीआरएफ (150) और आईटीबीपी के कर्मी इलाके में मौजूद हैं। अगर मौसम नहीं बिगड़ता है और कोई दूसरा ग्लेशियर नहीं टूटता है तब अगले 24 घंटे सुरंग में फंसे इन मजदूरों को बचाए जाने के लिहाज से अहम साबित हो सकते हैं।
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