रविवार, 7 फ़रवरी 2021

शिलासमुद्र ग्लेशियर पर खतरा? भूकंप से हुआ नुकसान तो होगी केदारनाथ से भी बड़ी जल त्रासदी और तबाह होंगे कई शहर

हरिद्वार उत्तराखंड के चमोली जिले में सोमवार को हुई त्रासदी के बाद पर्यावरणविदों ने एक और संकट को लेकर सरकार और प्रशासन को आगाह कर दिया है। चमोली जिले में नंदाकिनी नदी के किनारे स्थित शिलासमुद्र ग्लेशियर भी किसी बड़े खतरे की आशंका के कारण अब वैज्ञानिकों की निगरानी में आ गया है। शिलासमुद्र ग्लेशियर के साथ सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसकी तलहटी पर कुछ दरारें और दो बड़े छेद बन गए हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि अगर किसी समय किसी भूकंप की स्थिति में इस ग्लेशियर को नुकसान होता है तो इसके कारण चमोली से लेकर हरिद्वार तक के तमाम जिले भयावह जल त्रासदी में तबाह हो जाएंगे। आशंका है कि इस जल त्रासदी का प्रभाव केदारनाथ में साल 2013 की जल त्रासदी से अधिक होगा। क्या है शिलासमुद्र ग्लेशियर? शिलासमुद्र ग्लेशियर को नंदा राजजात के एक पड़ाव के रूप में जाना जाता है। यह ग्लेशियर करीब 8 किलोमीटर के परिक्षेत्र में फैला है और इसे उत्तराखंड में पर्यावरण की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्लेशियर के ऊपर बड़ी संख्या में भारी पत्थर पड़े हुए हैं, लेकिन समस्या यह है कि इसकी तलहटी में दो छेद बन गए हैं। भूकंप से हो सकता है नुकसान पर्यावरणविदों का कहना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आने वाले भूकंपों से शिलासमुद्र ग्लेशियर को नुकसान हो सकता है। ग्लोबल वॉर्मिंग के प्रभाव के कारण उत्तराखंड के तमाम ग्लेशियर बीते कुछ सालों में पिछले हैं, जिसके कारण यहां की तमाम नदियों का जलस्तर बढ़ा है। ऐसे में अगर किसी भूकंप के कारण नंदाकिनी नदी के किनारे स्थित शिलासमुद्र ग्लेशियर को नुकसान होता है तो इससे भीषण जल त्रासदी की स्थिति बन सकती है। नहीं रुका अंधाधुंध विकास तो होगा नुकसान! वैज्ञानिकों का मानना है कि शिलासमुद्र ग्लेशियर की तलहटी में बन रहे छेद चिंता का विषय हैं। ऐसी सलाह दी गई है कि अगर विकास के भार और वनों की कटाई का काम ऐसे ही जारी रहा तो इससे यहां के पर्यावरण के लिए खतरा पैदा हो सकता है। एक समस्या यह भी है कि गढ़वाल हिमालय की सतह अभी काफी कमजोर है। ऐसे में पर्वतीय इलाकों में आने वाले भूकंप से यहां के ग्लेशियरों को नुकसान होने की संभावना ज्यादा है।


from Uttarakhand News in Hindi, Uttarakhand News, उत्तराखंड समाचार, उत्तराखंड खबरें| Navbharat Times https://ift.tt/36Uelr3

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें