रविवार, 7 फ़रवरी 2021

Uttarakhand Glacier Burst News : उत्तराखंड में 'एटम बम' क्यों बन गया ग्लेशियर, वैज्ञानिक दे रहे ये चेतावनी

नई दिल्ली उत्तराखंड में ग्लेशियर का फटना अपने आप में एक दुर्लभ घटना है। वैज्ञानिकों की तरफ से यह बात कही गई है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि सैटेलाइट और गूगल अर्थ से प्राप्त तस्वीरों से यह साफ नहीं हो रहा है कि वहां पर ग्लेशियल लेक जैसा कुछ है। इस बात की संभावना व्यक्त की गई है कि वहां वाटर पॉकेट्स (ग्लेशियर के भीतर लेक) हो सकते हैं जिसकी वजह से ग्लेशियर के 'एटम बम' जैसे फटने की घटना हुई हो। पिछले कुछ सालों से समूचा हिंदू कुश हिमालयी क्षेत्र क्लाइमेट चेंज का हॉटस्पॉट बन कर उभरा है। आर्कटिक में पिघल रही बर्फ नहीं घर में ही है चुनौती वैज्ञानिकों के अनुसार घटना को लेकर आगे विश्लेषण करने की जरूरत है। मौसम रिपोर्ट के अनुसार चमोली जिले में रविवार तक धूप निकलने का पूर्वानुमान था। ऐसे में ग्लेशियर फटने की आशंका नहीं थी। राज्य में सोमवार को भी बारिश नहीं होने का अनुमान है। हालांकि इस घटना से यह साफ हो गया है कि क्लाइमेट चेंज का बड़ी चुनौती आर्कटिक में पिघल रही बर्फ नहीं बल्कि अपने घर के पास ही है। मौसम की रिपोर्ट और डेटा से होगी पुष्टि आईआईटी इंदौर के ग्लेशियोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर मोहम्मद फारूक आजम ने कहा कि ग्लेशियर फटने की घटना बहुत ही दुर्लभ है। यह संभव है कि उस क्षेत्र में वॉटर पॉकेट हो जहां से फूटा हो। हमें इस बारे में आगे विश्लेषण करने की जरूरत है। मौसम की रिपोर्ट और डेटा से ही इस बात की पुष्टि हो पाएगी कि वास्तव में वहां क्या हुआ था। लैंडस्लाइड के साथ बर्फीले तूफान से इनकार नहीं हालांकि, उन्होंने लैंड स्लाइड के साथ बर्फीले तूफान की आशंका से इनकार नहीं किया। आजम ने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण इस क्षेत्र का तापमान बढ़ रहा है। नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी को इस बात की सूचना दी जा चुकी है कि ग्लेशियर के फटने के कारण ऋषिगंगा नदी में जल स्तर बढ़ सकता है। ग्लेशियर फटने के कारण ऋषिगंगा में 13.2 मेगावाट का छोटा हाइड्रो प्रोजेक्ट पूरी तरह से तबाह हो चुका है। आसपास के गांवों में कोई खतरा नहीं केंद्रीय जल आयोग की सूचना के अनुसार एक अधिकारी की तरफ से बयान में कहा गया कि निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा नहीं है। इसके साथ ही पड़ोस के गांवों में भी किसी भी प्रकार का खतरा नहीं है। हिंदू-कुश हिमालयी क्षेत्र में बढ़ रहा तापमान ग्लेशियल के पिघलने के संबंध में ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव की बात कागजों में भी दर्ज है। इंटरनैशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) की एक हालिया आकलन रिपोर्ट में यह बताया गया कि हिंदू-कुश हिमालयी क्षेत्र में तापमान बढ़ रहा था। वैश्विक तापमान बढ़ने के साथ-साथ हिमालयी क्षेत्र में इसका अधिक प्रभाव पड़ेगा। तापमान में 1.5 डिग्री तक लानी होगी कमी हैदराबाद में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के रिसर्च डायरेक्टर और असिस्टेंट एसोसिएट प्रोफेसर अंजल प्रकाश ने कहा कि "अगर दुनिया हिंदू-कुश हिमालयी क्षेत्र में तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रख सकती है, तो यह कम से कम 1.8 डिग्री सेल्सियस और कुछ स्थानों पर 2.2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के रूप में होगा। यह घटना वास्तव में दिखाती है कि हम कितने कमजोर हो सकते हैं


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