नैनीताल से लोकसभा सदस्य भट्ट ने धामी को लिखे एक पत्र में कहा कि राज्य मंत्रिमंडल से प्रस्ताव स्वीकृत करा प्रदेश के औद्योनिक विभाग की इस भूमि को विश्व भारती विश्वविद्यालय को हस्तांतरित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रामगढ़ क्षेत्र टैगोर टॉप गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की कर्मस्थली रही है जहां वह पांच बार आए और अपने जीवन का काफी समय व्यतीत किया। गुरुदेव ने रामगढ़ में अपने चर्चित कविता संग्रह 'शिशु' के अलावा 'गीतांजलि' के भी कुछ भाग की रचना की जिसके लिए उन्हें 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार भी मिला।
भट्ट ने कहा कि विश्व भारती केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होने के नाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामगढ़ में विश्वविद्यालय के दूसरे परिसर की स्थापना में अपनी रूचि व्यक्त की है जो हमारे प्रदेश के लिए बहुत गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय की सर्वोच्च संस्था कार्यपरिषद पिछले साल रामगढ़ में विश्वविद्यालय के नए परिसर की स्थापना का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर चुकी है।
भट्ट ने कहा, ‘‘यह न केवल रामगढ़ बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए प्रधानमंत्री की ओर से एक और विशेष सौगात है।’’
उन्होंने कहा कि रामगढ़ में औद्यौगिक विभाग की रिक्त पड़ी 300 एकड़ भूमि को विश्वविद्यालय को देने से जहां इस बंजर भूमि का उपयोग होगा, वहीं विश्व भारती जैसा प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान खुलने से उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ी क्रांति आएगी और लोगों को रोजगार मिलेगा।
from Uttarakhand News in Hindi, Uttarakhand News, उत्तराखंड समाचार, उत्तराखंड खबरें| Navbharat Times https://ift.tt/3mxAQJi
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें