देहरादून कोरोना वायरस के कारण इस बार का (आइएमए) कुछ अलग अंदाज में नजर आएगी। 13 जून शनिवार को होने वाली पासिंग आउड परेड के दौरान दर्शक दीर्घा पूरी तरह से खाली रहेगी। इस परेड में आइएमए से 423 कैडेट पास आउट होंगे। इसमें 333 भारतीय सेना का हिस्सा बनेंगे, जबकि अन्य 90 विदेशी कैडेट हैं। बता दें कि आईएमए देहरादून के 88 साल के गौरवपूर्ण इतिहास में पहली बार पासिंग आउट परेड सिर्फ रस्म अदायगी तक सीमित रहेगी। आईएमए की कठिन ट्रेनिंग के बाद पास आउड कैडेट्स की वर्दी पर रैंक का बैच लगाने के लिए केडेट्स के लिए उनके माता पिता मौजूद नहीं होंगे। पहली बार पीपिंग सेरेमनी के दौरान ऑफिसर्स जेंटलमेंट कैडेट्स की वर्दी पर रैंक लगाएंगे। इस बार आईएमए के जेंटलमेंट कैडेट्स चैटवुड बिल्डिंग से अंतिम पग निकालते हुए अपने करियर की पहली 'पग' चढ़ेंगे। अंतिम पग के साथ ही पासआउट अधिकारियों को उनके रेजिमेंट में तैनाती दे दी जाएगी। आइएमए की तरफ से बताया गया कि पासिंग आउट परेड के दौरान लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए ही परिजन अपने बच्चों की परेड घर बैठे देख सकेंगे। 1934 में पास आउट हुआ था पहला बैच एक अक्टूबर 1932 में 40 कैडेट्स के साथ आईएमए की स्थापना हुई और 1934 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी से पहला बैच पास आउट हुआ। 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के नायक रहे भारतीय सेना के पहले फील्ड मार्शल जनरल सैम मानेकशॉ भी इसी एकेडमी के छात्र रह चुके हैं। इंडियन मिलिट्री एकेडमी से देश-विदेश की सेनाओं को 62 हजार 139 युवा अफसर मिल चुके हैं। इनमें मित्र देशों के 2413 युवा अफसर भी शामिल हैं ।
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