नैनीताल नैनीताल स्थित आर्यभट्ट रीसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंस (aryabhatta research institute) (एरीज) ने () पर लाइव के अद्भुत नजारे दिखाने के लिए इसका लिंक देश के चुनिंदा सौ लोगों को शेयर किया। इसमें खगोल विज्ञान से जुड़े शोध छात्र और वैज्ञानकि शामिल रहे। एरीज की वेबसाइट और यूट्यूब पर भी सूर्यग्रहण का लिंक शेयर किया गया। हालांकि, धुंध होने के कारण विजिबिलिटी कम होने से ग्रहण साफ नजर नहीं आया। नैनीताल में सुबह 10:25 बजे सूर्य ग्रहण की चपेट में आना शुरू हो गया। दोपहर 12:08 बजे 95 फीसदी सूर्य ग्रहण की गिरफ्त में आ गया। दोपहर 1:54 बजे सूर्य ग्रहण से मुक्त हो गया। एरीज के वैज्ञानिक डॉ शशिभूषण पांडेय ने बताया कि वलयाकार ग्रहण उत्तराखंड में देहरादून, नई टिहरी, चमोली, जोशीमठ व गोपेश्वर आदि बेल्ट में ही नजर आया। इन क्षेत्रों में भी चंद्रमा सूर्य का 99 प्रतिशत ही ढक पाया। 11 साल बाद होगा वलयाकार सूर्य ग्रहण वरिष्ठ वैज्ञानिक पांडेय ने बताया कि एरीज में वैज्ञानिकों ने छह इंच टेलिस्कोप के लेंस के साथ 3-3 इंच की दो छोटी टेलिस्कोप से सूर्य ग्रहण का प्रसारण किया। वैज्ञानिक लिहाज से यह ग्रहण बेहद महत्वपूर्ण होता है। वलयाकार सूर्यग्रहण में चंद्रमा की छाया सूर्य को पूरी तरह से ढक नही पाती है और सूर्य के चारों ओर गोल आंखिरी हिस्सा छाया से मुक्त रहता है। रिंग ऑफ फायर यानी वलयाकार सूर्य ग्रहण इससे पूर्व पिछले साल 26 दिसंबर को हुआ था, जिसमें वलयाकार ग्रहण दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में देखने को मिला था। इसके अलावा अन्य हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण ही देखने को मिला था। अब अगला वलयाकार सूर्य ग्रहण 11 साल बाद देखने को मिलेगा।
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