सचिव, पंकज कुमार पाण्डेय द्वारा राज्य के औषधि नियंत्रक को जारी एक आदेश में कहा गया कि हाल में उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा इस इंजेक्शन की आपूर्ति और बिक्री की कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए थे।
पाण्डेय ने कहा कि सभी औषधि निरीक्षक अपने क्षेत्रों में संचालित दवा की दुकानों का लगातार निरीक्षण करें जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं रेमडेसिविर की कमी तो नहीं है या उसकी कीमत ज्यादा तो नहीं वसूली जा रही है।
उन्होंने कहा कि संबंधित औषधि निरीक्षक यह भी सुनिश्चित करें कि रेमडेसिविर के हर पैक पर क्यूआर कोड जरूर लगा हो और अगर कोई फार्मासिस्ट रेमडेसिविर इंजेक्शन की जमाखोरी करता या उसके लिए तय कीमत से ज्यादा धन वसूल करता पाया जाए तो औषधि निरीक्षक उसके खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई करें ।
सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने बुधवार को बताया था कि प्रदेश के निजी अस्पतालों को रेमडेसिविर इंजेक्शन का इस्तेमाल तय मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार ही करने को कहा गया है। उन्होंने हालांकि कहा कि हमारे पास ये इंजेक्शन फिलहाल पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं ।
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