मानसेरा को मुख्यमंत्री का मीडिया सलाहकार नियुक्त करने का आदेश 17 मई को जारी किया गया था और उनके पद संभालने से पहले ही 19 मई को इसे वापस ले लिया गया।
नियुक्ति का आदेश अचानक वापस लेने का कारण मानसेरा की नियुक्ति को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
बताया जाता है कि मानसेरा की नियुक्ति यहां भाजपा नेताओं के एक वर्ग को पसंद नहीं आयी क्योंकि वह अतीत में नरेंद्र मोदी सरकार के आलोचक रहे हैं, जब वह एक राष्ट्रीय समाचार चैनल के लिए उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के लिए एक पत्रकार के रूप में कार्यरत थे।
मानसेरा की नियुक्ति की खबर आने के साथ ही सोशल मीडिया में उनके पहले के उन ट्वीट की चर्चा होने लगी जिसमें केंद्र में भाजपा सरकार के बारे में उनके आलोचनात्मक विचार प्रतिबिंबित हुए थे।
आरोप लगाया गया कि वह मीडिया के एक विशेष वर्ग से संबंधित हैं और उत्तराखंड के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के करीबी हैं, जिन्होंने उनकी नियुक्ति में भी भूमिका निभाई थी।
बुधवार को एक नया आदेश जारी किया गया जिसके जरिये उस आदेश को वापस ले लिया गया जिससे मानसेरा को पद पर नियुक्त किया गया था।
मानसेरा ने बुधवार को एक ट्वीट में यह भी कहा कि उनकी नियुक्ति एक पत्रकार के रूप में उनके अनुभव के आधार पर की गई थी लेकिन यह कुछ लोगों को अच्छी नहीं लगी।
उन्होंने कहा कि वह इस पद को स्वीकार करने से इनकार करते हैं क्योंकि वह ऐसे लोगों के बीच अपना काम नहीं कर सकते जो उन्हें काम नहीं करने देंगे।
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