प्रदेश के शहरी विकास विभाग के अनुसार बीस अप्रैल और दो मई के बीच कोविड-19 संक्रमितों के 1523 शव जलाए या दफनाए गए जबकि राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसी अवधि के दौरान केवल 910 मौतें ही दर्ज की गईं।
इन दोनों विभागों के आंकडों में 613 का अंतर है। उक्त अवधि के दौरान संख्याओं में यह अंतर तब सामने आया जब शहरी विकास सचिव विनोद कुमार सुमन द्वारा अतिरिक्त मुख्य सचिव को लिखे एक पत्र में दाहसंस्कार किये गए और दफनाए गए शवों की संख्या की तुलना चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय द्वारा दर्ज मौतों के आंकडों से की गई।
इस बारे में संपर्क किए जाने पर अधिकारियों ने दोनों सरकारी विभागों के बीच आंकडों में अंतर के बारे में कोई साफ स्पष्टीकरण नहीं दिया।
हांलांकि, देहरादून नगर निगम के एक अधिकारी ने अपना नाम न उजागर किए जाने की शर्त पर कहा, ‘‘कई कोविड-19 मरीजों की मौत घर पर पृथकवास में होती है और इस प्रकार की कई मौतें दर्ज नहीं हो पातीं। इसी कारण से संभवत: दोनों विभागों के आंकड़ों में मेल नहीं हो पा रहा है।’’
कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार, कोविड मरीजों की मौत होने पर उनके शवों का अंतिम संस्कार कोविड-19 निर्दिष्ट श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों में ही किया जा सकता है।
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