सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

Uttarakhand Glacier News: चिपको आंदोलन के गवाह बने रैणी गांव में आपदा के बाद दहशत, जंगल में रात गुजार रहे लोग

चमोली चमोली जिले का रैणी गांव। यह 'चिपको आंदोलन' की नेत्री गौरा देवी का वही गांव है, जिसने देश-दुनिया में पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाई। आज यही गांव पर्यावरणीय संकट के कारण आपदा की विभीषिका झेलने को मजबूर है। उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को आयी आपदा ने स्थानीय लोगों में इस कदर डर पैदा कर दिया है कि वे अपने घर में रात गुजारने से भी कतरा रहे हैं। रैणी गांव के निवासियों ने अपने घरों से लगभग 1 किलोमीटर दूर जंगल में रविवार की रात बिताई। ऐसे क्षेत्र में जहां रात में तापमान 1-2 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, और ठंड काफी बढ़ जाती है। दरअसल आपदा के बाद ग्रामीणों ने खुले जंगल में रात बिताने का फैसला किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कोई आपदा आती है तो किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान से बचने के लिए वे खुले जंगल में रात बिता रहे हैं। उनके मुताबिक वे घर पर रहने से इसलिए बच रहे हैं क्योंकि अगर रात में भूस्खलन या बाढ़ जैसी कोई भी आपदा आती है, तो वे शेल्टर के लिए नहीं जा सकते है। रैणी चक सुभाई गांव की प्रधान भावना राणा बताती हैं कि विडंबना यह है कि एक गांव जो अपनी पारिस्थितिक चेतना के लिए जाना जाता है, उसने एक बड़े पैमाने पर आपदा का सामना किया है। यहां गंगा नदी और रावी चक लता गांव से अलग होने वाली सड़क राणा गंगा नदी और एक सड़क का विस्तार करती है। ग्रामीण महिला ने बयां की आपदा की आंखो देखी एक ग्रामीण महिला ने आपदा की आंखों देखी बयां कि वे उसके चश्मदीद गवाह थी उनका कहना था कि वे अभी भी सदमे की स्थिति में हैं। दरअसल आपदा के बाद पुल लगभग कुछ दूर चला गया। उन्होंने कहा कि उनके पति आपदा के समय अपनी बकरियों को पाल रहे थे। “उन्होंने उन्हें वापस बुलाने के लिए चिल्लाया, लेकिन बाढ़ कुछ ही सेकंड में उनके करीब पहुंच गई। थोड़ी देर के लिए, मैंने सोचा कि वह नहीं बचेंगे लेकिन सौभाग्य से, बाढ़ उसके पास से कुछ फीट दूर से निकली और वे बच गए , लेकिन बकरियां बह गईं। बिजली बाधित, गांव के तीन लोग लापता बीते रविवार आई बाढ़ में मोटरेबल सड़क के धंस जाने के बाद रैनी चक लता गांव मुख्य सड़क से जुड़ गया है। गांव की प्रधान शोभा राणा ने कहा कि जब वह गांव में थीं, तब वह जोशीमठ में थीं। मेरा उनसे कोई संपर्क नहीं है। वहां बिजली की आपूर्ति नहीं है। प्रशासन हेलीकॉप्टरों द्वारा आवश्यक सामानों की आपूर्ति करने की कोशिश कर रहा है, उन्होंने कहा कि उनके गांव के तीन लोग लापता हैं। यहीं से हुई थी चिपको आंदोलन की शुरूआत चिपको आंदोलन ने पूरी दुनिया में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था। पर्यावरण संरक्षण का जिस भूमि से पूरी दुनिया को संदेश मिला, आज वह गांव एकबार फिर चर्चा में है, लेकिन आज इस गांव के चर्चा में आने की वजह ग्लेशियर फटने की प्राकृतिक आपदा है।


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