रविवार, 7 फ़रवरी 2021

Uttarakhand Glacier Burst: गांववाले बोले- सफेद धुएं के साथ मलबा लेकर आती नदी का विकराल रूप, नहीं देखी कभी ऐसी जलप्रलय

जोशीमठ लोगों ने कभी सोचा भी नहीं था कि शांत स्वभाव में बहने वाली ऋषि गंगा नदी इतनी तबाही मचा देगी। नदी में भयंकर बाढ़ आने से लोग 'भागो-भागो' की आवाजें लगाने लगे। लोगों का कहना था कि ऐसा आज तक कभी नहीं देखा। उत्तराखंड के चमोली में रविवार को नंदा देवी ग्लेशियर का हिस्सा टूटने से ऋषिगंगा में बाढ़ आ गई थी। इस आपदा में अब तक 8 लोगों के शव बरामद किए गए हैं जबकि 125 लापता बताए जा रहे हैं। ऋषि गंगा शीर्ष भाग से ही ढलान पर बहती है। जिससे नदी का पानी तेज बहाव से निचले क्षेत्र में पहुंच गया और सबकुछ तबाह करके चला गया। रैनी गांव के उदय सिंह ने बताया कि सुबह साढ़े नौ बजे ऊपरी हिमालय क्षेत्र से सफेद धुएं के साथ नदी मलबे के साथ बहकर आती दिखने से लोगों में खौफ छा गया। नदी के तेज बहाव से डरावनी आवाजें निकल रही थीं। बैराज साइड पर काम कर रहे थे मजदूर लोग नदी का पानी को देखकर अपने घरों से बाहर निकल गए। धौली गंगा पर निर्माणाधीन तपोवन-विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना के निर्माण में मजदूर काम कर रहे थे लेकिन सुबह दस बजे जैसे ही धौली गांव का जल स्तर बढ़ने लगा लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग बैराज साइड काम कर रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों में चले जाने के लिए आवाज लगा रहे थे, लेकिन नदी की तेज गर्जना से मजदूरों को कुछ सुनाई नहीं दिया। मलबे में दफन हो गया टनल देखते ही देखते परियोजना का बैराज और टनल मलबे में दफन हो गया। रैनी गांव के लोगों का कहना है कि नंदा देवी पर्वत की तलहटी से ग्लेशियर के टूटने से यह तबाही मची है। ऐसी भयंकर जलप्रलय कभी नहीं देखा थी। सैलाब सबकुछ बहा ले गया चमोली जिले में धौलीगंगा के किनारे ऋषिगंगा पावर प्रॉजेक्ट पूरी तरह बर्बाद हो गया। अब यहां चारों ओर मलबा ही नजर आ रहा है। ऋषिगंगा व धौलीगंगा के आसपास रहने वालों का सम्पर्क शेष दुनिया से टूट गया है। यह मंजर देख लोगों को केदारनाथ की तबाही याद आ गई। प्रॉजेक्ट साइट्स पर फंसे ज्यादातर लोग तेलुगू चमोली जिले में ऋषिगंगा और एनटीपीसी की प्रॉजेक्ट साइट पर फंसे लोगों को निकालने के लिए आईटीबीपी और एसआरडीएफ ने अभियान चलाया। बताते हैं, प्रॉजेक्ट साइट पर ज्यादातर फंसे लोग आंध्र प्रदेश के तेलुगु समुदाय से हैं। देर शाम तक वहां से 16 लोगों को बचाया जा चुका था। एयरफोर्स ने एनडीआरएफ की 5 टीमें और नेवी के गोताखोर एयरलिफ्ट किए हैं। मदद के लिए चिनूक हेलिकॉप्टर और सेना भी तैयार है। पहले भी आईं आपदाएं- 2013 : केदारनाथ में बादल फटने से तबाही, 5,700 लोगों की मौत 1999 : चमोली जिले में 6.8 तीव्रता का भूकंप, 100 लोगों की जान गई 1998 : पिथौरागढ़ में भूस्खलन से गांव दफन, करीब 255 लोग मारे गए 1991 : उत्तरकाशी में 6.8 तीव्रता का भूकंप। 768 लोगों की मौत हुई


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