सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

Uttarakhand Floods: सुरंग के मुंह पर खड़े उस किस्मतवाले की आंखों देखी, जिसने सैलाब को हरा दिया

नई दिल्‍ली/जोशीमठ तपोवन स्थित NTPC लिमिटेड के हाइड्रो पावर प्रॉजेक्‍ट में रविवार सुबह बिजली चले जाने से सारी मशीनें ठप हो गई थीं। ये कोई बड़ी समस्‍या नहीं थी लेकिन पांच मिनट बाद अचानक एक शोर उठा, 'बाढ़... बाढ़...'। 27 साल के मनीष कुमार उस वक्‍त साइट पर ही मौजूद थे। उन्‍हें लगा कि ठंड में कहां से बाढ़ जा आएगी... मगर उन्‍हें सामने से धुआं उठता नजर आने लगा था। वह एक सुरंग के मुहाने पर खड़े थे। वही सुरंग जिसमें कुछ देर बाद ही उनके कई साथ फंसने वाले थे। बिना कुछ सोचे, मनीष ने दौड़ लगा दी... उस पहाड़ी पर जिसपर कोई पक्‍का रास्‍ता नहीं था.. बस एक पगडंडी थी। मनीष ने पीछे मुड़कर नहीं देखा...बस भागते रहे... तबतक जबतक उन्‍हें नहीं लगा कि सुरक्षित जगह पहुंच गए हैं। उनके ठीक पीछे दो लोग और थे मगर उनकी किस्‍मत इतनी अच्‍छी नहीं थी। हिंदुस्‍तान टाइम्‍स से बातचीत में मनीष ने कहा, "जिन्‍होंने पीछे पलटकर देखा ये समझने के लिए क्‍या हो रहा है, वो सैलाब में बह गए। मेरे पीछे लोग मदद के लिए चिल्‍ला रहे थे लेकिन उनकी मदद नहीं हो सकती थी।" मनीष अपने रूममेट महेंद्र का इंतजार कर रहे हैं जो उसी सुरंग में फंसे हुए हैं। केबल पकड़कर झूलते रहे वो...संडे का दिन था तो अधिकतर वर्कर्स के लिए छुट्टी का माहौल था। मगर कुछ ऐसे थे जो एक्‍स्‍ट्रा काम करना चाहते थे। मनीष और महेंद्र ऐसे ही कुछ लोगों में से थे। धौलीगंगा नदी के किनारे हाइड्रोपावर प्‍लांट्स में काम करने वाले मॉनसून में तो सावधान रहते हैं मगर ठंड के मौसम में इतना ध्‍यान नहीं देते। यही वजह है कि जब आपदा आई तो कोई तैयार नहीं था। दूर खड़े होकर सबकुछ देखने वाले वेल्‍डर हरिंदर सिंह ने कहा, "बांध के पास एक्‍सकेवेटर और एक ट्रक पर कुछ लोग बैठे हुए थे। जब पानी और मलबा तेजी से आया तो अधिकतर फौरन बह गए, लेकिन दो बचने में कामयाब रहे। उन दोनों नेबांध के पास लटक रहीं मोटी केबल्‍स पकड़ ली थीं। जैसे-जैसे पानी बढ़ा तो दोनों ऊपर चढ़ते गए और फिर पहाड़ी की ओर छलांग लगा दी।" रोशनी दिखी और सांस लेने के लिए हवा मिली...तपोवन बिजली परियोजना में कार्यरत लाल बहादुर ने कहा, ''हमने लोगों की आवाजें सुनीं जो चिल्लाकर हमे सुरंग से बाहर आने के लिये कह रहे थे, लेकिन इससे पहले कि हम कुछ कर पाते पानी और कीचड़ की जोरदार लहर अचानक हम पर टूट पड़ी।'' नेपाल के निवासी बसंत ने कहा, '' हम सुरंग में 300 मीटर अंदर थे, जब पानी का तेज बहाव आया।'' चमोली के ढाक गांव से संबंध रखने वाले तथा तपोवन परियोना में कार्यरत एक और श्रमिक ने बताया कि वे बस किसी तरह सुरंग के बाहर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। अस्पताल में भर्ती एक व्यक्ति ने बताया, ''हमने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन फिर हमें कुछ रोशनी दिखी और सांस लेने के लिये हवा मिली...अचानक हम में से एक व्यक्ति ने देखा की उसके मोबाइल के नेटवर्क आ रहे हैं उसने महाप्रबंधक को फोन कर हमारी स्थिति के बारे में बताया।''


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