ऋषिकेश गंगा में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए एक अनूठी पहल के तहत ऋषिकेश जिला प्रशासन एक परियोजना शुरू करेगा। इसके तहत भक्तों के चढ़ाए गए फूलों को नदी में बहने देने के बजाय उनका इस्तेमाल जैविक अगरबत्ती बनाने के लिए किया जाएगा। इसके तहत के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के अलावा स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। आयुक्त नरेंद्र सिंह क्विरियाल ने शुक्रवार को बताया कि के मानद अध्यक्ष और देहरादून के जिलाधिकारी आशीष कुमार श्रीवास्तव ने हाल ही में सरकार की ओर से नियुक्त पैनल के समक्ष इस पायलट प्रोजेक्ट का खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्य सचिव एन रविशंकर की अध्यक्षता वाले पैनल ने इस विचार को काफी सराहा है। स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार पैनल में कई पर्यावरणविद शामिल हैं। यह पैनल सुशासन और प्रशासन के लिए नई पहल और मॉडल पेश करने के लिए हर साल मुख्यमंत्री पुरस्कार के लिए नौकरशाहों का चयन करता है। क्विरियाल ने कहा कि इस पहल से न केवल गंगा में प्रदूषण का स्तर कम होगा, बल्कि जैविक अगरबत्ती के निर्माण के लिए एक नया उद्योग भी शुरू होगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के अलावा स्थानीय लोगों को रोजगार देगा। त्रिवेणी घाट पर रखे जाएंगे फूलों के पांच कंटेनर क्विरियाल ने कहा कि ऋषिकेश में गंगा के सबसे पुराने तट- त्रिवेणी घाट पर फूलों के पांच कंटेनर रखे जाएंगे और बेरोजगार युवकों को मंदिरों और घरों में भक्तों की ओर से चढ़ाए गए फूलों को इकट्ठा करने और उन्हें कंटेनरों में जमा करने का काम सौंपा जाएगा।
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