देवेश सागर, हरिद्वार कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद से ही उत्तराखंड में लगा हुआ है। प्रदेश सरकार इस कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूरे प्रयास कर रही है। कोरोना संक्रमण की वजह से प्रदेश में लगने वाले लॉकडाउन के कारण हरिद्वार में फूलों की खेती करने वाले किसान भी प्रभावित हो रहे हैं।लॉकडाउन के कारण फूलों की बिक्री और मांग ना होने से इन किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। समय पर फूलों की मांग और फूलों की बिक्री न होने की वजह से क्षेत्र के किसानों को अपनी खेती के फूलों को तोड़कर कूड़े में डालने पड़ रहे हैं। इस वजह से इन किसानों को लाखों का नुकसान हो रहा है और इन किसानों के ऊपर रोजी-रोटी का संकट मंडराने लगा है। आजीविका के लिए जद्दोजहद करने को मजबूर हरिद्वार के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रो के किसान भारी मात्रा में फूलों की खेती करते है। ग्रामीण क्षेत्र आनेकी, हेत्तमपुर, गढ़मीरपुर, बिहारीगढ़, सहदेवपुर, रोहलकी आदि विभिन्न क्षेत्रों के किसानों ने मूल खेती जैसे गेंहू, धान और गन्ने से हटकर फूलों की खेती को अपनाया है,और इसे अपनी आजिविका का साधन बनाया हुआ है।फूलों की खेती करने से इन किसानों को सामान्य दिनों में प्रति एक हेक्टेयर एक लाख से डेढ़ लाख रुपए की आमदनी होती थी जो अब लॉकडाउन के समय घटकर प्रति एक हेक्टेयर 50 हज़ार रुपये से भी कम हो गई है। लॉकडाउन से पहले यह किसान अन्य किसानों को भी फूलों की खेती करने के लिए प्रेरीत करते थे, मगर आज यह किसान खुद आजिविका के लिए त्रस्त हो चुके है और अपनी आजीविका के लिए जद्दोजहद करने को मजबूर है। लॉकडाउन के चलते धंधा पूरी तरह चौपट सामान्य दिनों की बात करे तो हरिद्वार में फूलों की खेती करने वाले किसानों का इस समय फूलों की बिक्री का सीजन होता है। इस समय शादियों का सीजन होने के कारण मार्केट में फूलों की मांग काफी बढ़ जाती है। मगर वर्तमान में कोरोना संक्रमण की वजह से सरकार ने लॉकडाउन लगाया गया है। हरिद्वार जिले में भी लगे लॉकडाउन के कारण फूलों की मंडी भी सही से नहीं खुल पा रही है। शादियों और अन्य समारोह सही से आयोजित ना होने के कारण फूलों की मांग घटी है। इससे फूलों की खेती करने वाले किसानों को लाखों रुपयों का नुकसान हो रहा है। क्षेत्र के किसान बलराज सिंह का कहना है प्रदेश लॉकडाउन की वजह से बंद है,इससे हमें काफी नुकसान हुआ है। हमें उम्मीद थी की शादियों के सीजन में फूलों मांग बढ़ेगी मगर लॉकडाउन होने की वजह से सभी फूलों की मंडी बंद है और फूलों की मांग काफी कम है। कूड़े में फेंकने पड़ रहे फूल, लाखों का हो रहा नुकसान हरिद्वार में फूलों की खेती करने वाले किसान अमित चौहान का यह भी कहना है कि लॉकडाउन की मार, शादियों और अन्य समारोह व अनुष्ठानों का आयोजन न होने, मार्केट में फूलों की मांग ना होने और फूलों की समय पर बिक्री ना होने के कारण हम किसानों को अपनी खेती के फूलों को भारी मात्रा में तोड़कर कूड़े में मजबूरन फेंकने पड़ रहे है। अगर हम खेती के फूलों को सही समय पर नही तोड़ेंगे तो हमारा फूलों का प्लांट खत्म हो जाएगा। फूलों को तोड़कर कूड़े में डालने से हमें काफी नुकसान हो रहा है। क्षेत्र में फूलों की खेती करने वाले हर किसान को पिछले दो-तीन महीनो में ढाई से तीन लाख का नुकसान हुआ है। अन्य किसानों की तरह नुकसान का मुआवजा दे सरकार हरिद्वार के किसान वीरेंद्र चौहान,राजेश चौहान,अमित चौहान,अमन सैनी और अन्य दूसरे फूलों की खेती करने वाले भारी संख्या में किसानो की मांग है कि उन्हें भी फसल के नुकसान का मुआवजा सरकार द्वारा दिया जाना चाहिए। इन किसानों का कहना है कि हम सरकार से यह चाहते हैं की जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आती है तो उस वक्त गेहूं,गन्ने,धान और अन्य दूसरी फसलों के नुकसान का मुआवजा सरकार द्वारा किसानों को दिया जाता है। ठीक इसी प्रकार से फूलों की खेती करने वालों को भी सरकार द्वारा नुकसान का मुआवजा दिया जाना चाहिए, ताकि वह भी अपने परिवार का भरण पोषण कर सके।
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