देहरादून उत्तराखंड में नए सीएम के रूप में के शपथ ग्रहण की तैयारी शुरू हो गई है। के इस्तीफे के बाद तीरथ सिंह रावत को सीएम पद की कमान सौंपने का फैसला हुआ है। इस फैसले को चुनाव से पहले बीजेपी के एक बड़े मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है। रावत फिलहाल उत्तराखंड के पौड़ी लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और उनकी पहचान एक सर्वमान्य नेता के रूप में रही है। ईमानदार छवि और स्वीकार्यता के लिए मशहूर टीएस रावत को कांग्रेस भी एक अजातशत्रु नेता कहती है। उत्तराखंड के सीएम पद के रूप में शपथ लेने जा रहे तीरथ सिंह रावत 1983 से संघ से जुड़े रहे हैं। रावत सांसद बनने से पहले 2012 से 2017 तक उत्तराखंड की चौबट्टाखाल विधानसभा के एमएलए रहे थे और वह अभी बीजेपी के नैशनल सेक्रेटरी भी हैं। 9 अप्रैल 1964 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के असवालस्यूं में जन्म लेने वाले तीरथ सिंह रावत सिर्फ 20 साल की उम्र में आरएसएस के प्रचारक बने थे। छात्र राजनीति और राम मंदिर आंदोलन में रहे सक्रिय तीरथ सिंह रावत ने गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीए और बिरला कॉलेज गढ़वाल से पोस्ट ग्रैजुएशन और पत्रकारिता की पढ़ाई की है। रावत पढ़ाई के बाद आरएसएस से जुड़े थे और वह 20 वर्ष की उम्र में संघ के प्रांत प्रचारक बने। इसके बाद उन्हें एबीवीपी के संगठन मंत्री के रूप में काम किया। रावत अपने छात्र जीवन में हेमवंती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे। वहीं राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उन्होंने 2 साल का कारावास भी झेला। कभी नहीं सोचा था, यहां तक पहुंच पाउंगा: तीरथ सिंह रावत तीरथ सिंह रावत ने सीएम पद के लिए चुने जाने के बाद केंद्रीय नेतृत्व को धन्यवाद दिया। रावत ने मीडिया से बात करते हुए कहा, मैं पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी चीफ जेपी नड्डा को धन्यवाद देता हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी ऐसे पद तक भी पहुंच सकूंगा। मैं वो सभी कोशिशें करूंगा जिससे कि उत्तराखंड के लोगों की आकांक्षाएं पूरी हो सकें। मैं उन सभी कामों को आगे लेकर जाउंगा, जो कि बीते चार सालों में शुरू किए गए हैं।
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