शनिवार, 6 मार्च 2021

Uttarakhand Chamoli Glacier News: भारी चट्टान खिसकने से फटा था चमोली में ग्लेशियर, आई जलप्रलय!

विश्व मोहन, नई दिल्ली उत्तराखंड के चमोली में जलप्रलय की वजह क्या थी, इस पर एक नई रिपोर्ट आई है। ऋषिगंगा, धौलीगंगा और अलकनंदा नदियों की घाटियों से होते हुए इस जलप्रलय ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। सैकड़ों लोगों का कुछ पता ही नहीं चला। इस बीच सरकारी संस्था इंटरनैशनल सेंटर ऑफ इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) की की एक रिपोर्ट सामने आई है। इससे पता चला है कि रोंटी पीक के नीचे एक बड़ी चट्टान के खिसकने से पैदा हुई ऊर्जा से ग्लेशियर की बर्फ पिघल गई। इसके बाद चमोली में भयावह जलप्रलय आई थी। शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक 22 मिलियन क्यूबिक मीटर की चट्टान गिरने से मलबा और बर्फ इकट्ठा हो गया। इसके बाद यह जलधारा में मिल गया और तेज बहाव के साथ जलप्रलय जैसे हालात पैदा हो गए। Maxar पोर्टल से मिली तस्वीरों का हवाला देते हुए ICIMOD के रिसर्चर्स ने बताया है कि करीब 550 मीटर चौड़ी एक विशालकाय चट्टान समुद्र की सतह से साढ़े पांच हजार मीटर की ऊंचाई पर खिसक गई थी। इस रिसर्च के मुताबिक ग्लेशियर फटने के लिए यही चट्टान जिम्मेदार थी। इलाके में कोई ग्लेशियल लेक भी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक 7 फरवरी को आई तबाही से दो दिन पहले वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से इलाके में मौसम बिगड़ गया था। इसके बाद बाढ़ का बहाव निचले इलाकों में काफी बढ़ गया। काठमांडू स्थित ICIMOD में नेपाल, भारत और चीन समेत आठ देश शामिल हैं। हिंदुकुश हिमालयन रीजन (HKH) में इस संस्था की रिसर्च को काफी विश्वसनीय माना जाता है। चमोली में आई इस जलप्रलय में कम से कम 70 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं 134 लोग अब भी लापता हैं। इस भयावह आपदा के दौरान तपोवन विष्णुगढ़ हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचा था। इसके साथ ही ऋषिगंगा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट भी तबाह हो गया था। इसके साथ ही इलाके के पारिस्थितिकी तंत्र पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। ICIMOD का कहना है कि चमोली में आई बाढ़ के लिए सिर्फ क्लाइमेट चेंज को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।


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