मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जे एस सुहाग ने यहां सोमवार को बताया कि आरटीआर घूमने आने वाले सैलानी अब वर्ष भर वन्यजीव सफारी पर सत्यनारायण मंदिर से कासरो तक जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि दोनों स्थानों के बीच की दूरी 19 किलोमीटर है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस निर्णय से पर्यटन को बढावा मिलने के साथ ही सफारी संचालकों को भी राहत मिलेगी जो कोविड-19 महामारी के कारण आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।’’ सुहाग ने कहा कि इसके अलावा, सफारी से आजीविका कमाने वाले अन्य लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।
आरटीआर के सफारी संचालकों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने हाल में सुहाग को पत्र लिखकर उनसे कार्बेट बाघ अभयारण्य की तरह राजाजी बाघ अभयारण्य के कुछ हिस्सों को वर्ष भर सफारी के लिए खोलने का अनुरोध किया था। इस साल जून में कार्बेट बाघ अभयारण्य की तीन रेंजों, गर्जिया, बिजरानी, धरा—झिरना, ढेला और पाखरों को वर्ष भर सफारी के लिए खोल दिया गया था।
सुहाग ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण राजाजी और कार्बेट दोनों का राजस्व बुरी तरह प्रभावित हुआ है और इस प्रकार के उपायों से इस प्रभाव से उबरने में मदद मिलेगी।
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