गंगोत्री, उसके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा, यमुनोत्री और उसके शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली में दोनों धामों के पुरोहितों ने एकदिवसीय सांकेतिक उपवास रखा और धरना दिया । इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
तीर्थ पुरोहित 11 जून से ही बांह पर काली पट्टी बांधकर धामों में पूजा अर्चना कर रहे हैं।
गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि तीर्थ पुरोहित 20 जून को चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए दोनों विश्व प्रसिद्ध धामों में हवन यज्ञ करेंगे और यदि सरकार द्वारा फिर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई तो वह उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे, जिसका खामियाजा सरकार को आगामी चुनावों में भुगतना पड़ेगा।
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में चारधामों सहित प्रदेश के 51 मंदिरों के प्रबंधन के लिए एक अधिनियम के जरिए देवस्थानम बोर्ड का गठन किया गया था ।
हालांकि, तीर्थ पुरोहित इसका शुरू से ही विरोध कर रहे हैं ।
मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद कुंभ के दौरान तीरथ सिंह रावत ने बोर्ड के मसले पर पुनर्विचार का संकेत देते हुए कहा था कि इस संबंध में सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद कोई निर्णय किया जाएगा ।
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