शनिवार, 12 जून 2021

'मैंने झाड़ू उठाई लेकिन मेरा बेटा बंदूक लेकर देश की सेवा करेगा'...सफाई कर्मचारी का बेटा बना सेना में अधिकारी

वाराणसी/देहरादून 'मैंने झाड़ू उठाई लेकिन मेरा बेटा अब बंदूक लेकर देश की सेवा करेगा।' यह कहते हुए सफाई कर्मचारी बिजेन्द्र कुमार करीब 10 साल पहले का वह समय याद करते हैं, जब अपने बेटे को पढ़ाई के लिए राजस्थान भेजते वक्त सेना का अधिकारी बनाने की बात करते थे। उत्तर प्रदेश के चंदौली निवासी बिजेन्द्र की उस बात को गांव के लोग हंसी में उड़ा देते थे। बिजेन्द्र कुमार की आंखों में आंसू और चेहरे पर मुस्कान थी, जब शनिवार को वह 21 साल के बेटे सुजीत को देहरादून के (IMA) से ग्रेजुएट होते देख रहे थे। सुजीत चंदौली के बसीला गांव से में अधिकारी बनने वाले पहले व्यक्ति बन गए हैं। सुजीत अपने छोटे भाई-बहनों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। वे सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे हैं। अभी वाराणसी में पोस्टेड पिता बिजेन्द्र ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, 'मैंने झाड़ू उठाई लेकिन मेरा बेटा अब बंदूक लेकर देश की सेवा करेगा। वह सेना में अधिकारी बनेगा।' सुजीत का परिवार पासिंग आउठ पैरेड देखने के लिए टीवी से चिपका रहा। कोविड गाइडलाइन्स की वजह से कैडेट्स के परिजन को समारोह में शिरकत करने की इजाजत नहीं मिली। वहीं सुजीत ने कहा कि इस मौके पर मां-बाप के चेहरों पर गर्व की झलक देखना मिस किया। वह आर्मी ऑर्डिेनेंस कॉर्प्स जॉइन करेंगे। सुजीत को उम्मीद है कि उनकी इस उपलब्धि से गांव और क्षेत्र के अन्य युवाओं में भी सेना की वर्दी पहनने की इच्छा बलवती होगी। सुजीत का छोटा भाई आईआईटी में पढ़ना चाहता है, जबकि दो बेटियों में से एक डॉक्टर और दूसरी आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं। पिता बिजेन्द्र ने बताया, 'मैं अपने तीन बच्चों को लेकर वाराणसी में ही रहता हूं, जिससे उन्हें पढ़ाई की बेहतर सुविधाएं मिल सके। मेरी पत्नी गांव में अकेले ही रहती हैं। वह आशा कार्यकर्ता हैं। हम बीच में गांव आते-जाते रहते हैं लेकिन यह तय कर लिया है कि बच्चों को बेहतर करियर देने के लिए जितना संभव होगा, उतना करूंगा।'


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