मंगलवार, 9 मार्च 2021

जानिए त्रिवेंद्र रावत के इस्तीफे का दिल्ली कनेक्शन, अगर इस्तीफा नहीं देते तो हो सकता था बड़ा 'खेल'

करन खुराना, देहरादून उत्तराखंड के 9वें मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की पारी का अंत आखिरकार आज हो ही गया, लेकिन वे अपने कार्यकाल के 4 साल पूरा करने से अछूते रह गए। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 18 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। 9 मार्च 2021 को उनको पद से इस्तीफा देना पड़ा। 9 दिन अगर वो और रह जाते तो 4 साल पूरे हो जाते। दरअसल बजट सत्र के दौरान शुरू हुआ सियासी खेल त्रिवेंद्र के दिल्ली दौरे के बाद काफी गर्म होगया था। पर्यवेक्षक के दौरे के बाद अगले ही दिन त्रिवेंद्र सिंह रावत दिल्ली रवाना हुए और उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से मिलने का समय मांगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात भी की, लेकिन वापिस आते ही राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया। इस बात को लेकर आज की प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी स्वीकारा और कहा कि मुझे किसी और को भी मौका देने के लिए कहा गया है इसलिए मैं खुद इस्तीफा दे रहा हूं। दूसरी तरफ अनियंत्रित अफ़सरशाही भी एक कारण बताया जा रहा है। अगर नहीं होता इस्तीफा तब... जानकारी के मुताबिक त्रिवेंद्र सिंह रावत से नाराज 22 से 25 विधायकों ने संयुक्त रूप से इस्तीफा देने की योजना बना ली थी। अगर ऐसा होता तो आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में एक नकरात्मक संदेश जाता। बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व यह झोखीम नहीं उठा सकता था। इसी को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को इस्तीफा देने के आदेश दिए। 'मुझ जैसे छोटे कार्यकर्ता को इतना बड़ा पद दिया' बताया जा रहा है कि पार्टी स्तर पर मंत्री, विधायक,कार्यकर्ता सब की शिकायत थी की उनकी प्रदेश में उनकी सुनवाई नहीं होती है। पत्रकारों से वार्ता करते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पार्टी का आभार व्यक्त किया। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि मुझ जैसे छोटे कार्यकर्ता को इतना बड़ा पद दिया। मैं इसका आभारी हूं। '..ज्यादा जानने के लिए आपको दिल्ली जाना होगा' जब पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से पूछा कि आपको आखिर क्यों हटाया गया। तब मुख्यमंत्री ने हंसते हुए कहा कि पार्टी का एक सामूहिक फैसला है। बाकी अगर आप ज्यादा अच्छी तरह जानना चाहते है तो आपको दिल्ली जाना होगा। इस बात से स्पष्ट होती है कि दिल्ली केंद्रीय नेतृत्व में त्रिवेंद्र के लिए कोई खासी नाराजगी थी जिसका खामियाजा त्रिवेंद्र को भुगतना पड़ा।


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