देहरादून कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के तो मुख्यमंत्री रहे ही, केंद्र में कई बार महत्वपूर्ण मंत्रालयों के मंत्री रहे। बाद के वर्षों में यूपीए कार्यकाल के दौरान उन्हें आंध्र प्रदेश का राज्यपाल भी बनाया गया। राजनीतिक गलियारों में माना जाता है कि अगर 1991 का लोकसभा चुनाव वह नहीं हारते, तो नरसिम्हा राव की जगह वही प्रधानमंत्री होते। खैर ये सब अतीत की बातें हैं। ताजा घटनाक्रम यह है कि सियासत के कई प्रतीकों को जिस तरह से बीजेपी अपने पाले में करके कांग्रेस को चिढ़ाती आई है, वैसा ही वह नारायण दत्त तिवारी को लेकर भी करने जा रही है। नारायण दत्त तिवारी को 'पहाड़ पुत्र' कहा ही जाता है। उत्तराखंड के वह अब तक के अकेले मुख्यमंत्री हुए हैं, जिन्होंने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया, वरना वहां पांच साल में तीन सीएम का औसत बन चुका है। उत्तराखंड में उनकी साख अब भी बरकरार है। अब जबकि राज्य में अगले कुछ महीनों के अंदर चुनाव होने हैं, बीजेपी उन पर दांव लगा सकती है। पिछले महीने की 18 तारीख को उनकी जयंती और पुण्यतिथि दोनों थी। अमूमन दूसरी पार्टी के नेताओं के नाम पर सरकारें नामकरण करने से बचती हैं जब तक कोई खास वजह न हो, लेकिन सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस मौके पर पंतनगर औद्योगिक क्षेत्र का नामकरण नारायण दत्त तिवारी के नाम पर किया। इसके बाद से ही यह चर्चा शुरू हो गई है कि बीजेपी अब नारायण दत्त तिवारी को भी अपने पाले में करने जा रही है। बीजेपी ने यह भी कहा कि 'पहाड़ पुत्र' कांग्रेस में जितने सम्मान के हकदार थे, कांग्रेस नेतृत्व ने वह उन्हें नहीं दिया। इस तरह की चर्चा है कि धामी सरकार जल्द ही नारायण दत्त तिवारी के नाम पर कुछ अन्य योजनाओं की शुरुआत कर सकती है।
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