गंगोत्री मंदिर समिति के संयुक्त सचिव राजेश सेमवाल ने कहा, ‘‘पुजारियों के शाप के कारण ही भाजपा को उत्तराखंड में साढ़े चार सालों में तीन मुख्यमंत्री बनाने पडे़। अगर पार्टी अपने अनुभव से नहीं सीखती और नये मुख्यमंत्री जल्द ही देवस्थानम बोर्ड को भंग नहीं करते तो पुजारियों के शाप के कारण 2022 में उनकी सरकार नहीं बन पाएगी।’’
देवस्थानम बोर्ड के गठन को अपने अधिकारों का अतिक्रमण बताते हुए दोनों हिमालयी मंदिरों के पुजारी अपनी मांग को लेकर पिछले कई सप्ताह से क्रमिक अनशन पर बैठे हैं।
देवस्थानम विधेयक पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के कार्यकाल में पारित हुआ था जिसका शुरूआत से ही पुरोहित विरोध कर रहे हैं।
मार्च में पद संभालने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने घोषणा की थी कि चारों धामों को देवस्थानम बोर्ड के दायरे से बाहर किया जाएगा और बोर्ड के गठन पर भी पुनर्विचार किया जाएगा।
हांलांकि, अपने वायदे को पूरा करने से पहले ही रावत को पद छोडना पड़ा।
from Uttarakhand News in Hindi, Uttarakhand News, उत्तराखंड समाचार, उत्तराखंड खबरें| Navbharat Times https://ift.tt/3hJOdUv
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें