यहां देवसंस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज में शांतिकुंज स्वर्ण जयंती व्याख्यानमाला के मौके पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं गायत्री परिवार व्यक्ति निर्माण का अभिनव कार्य कर रहे हैं ।
भागवत ने कहा कि केवल अपना भौतिक सुख ही सब कुछ नहीं है बल्कि 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के भाव से किए जाने वाले कार्य से आत्मा को संतुष्टि मिलती है और यही सबका लक्ष्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा ।
इससे पहले, विश्वविद्यालय पहुंचने पर सरसंघचालक का प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने मंगल तिलक करके एवं उपवस्त्र भेंटकर स्वागत किया। यहाँ भागवत ने प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर पर पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्र की सुख, समृद्धि की प्रार्थना की।
इससे पूर्व, भागवत ने सोमवार सुबह हर की पैड़ी पहुंचकर गंगा की पूजा अर्चना कर राष्ट्र की उन्नति, समृद्धि, विश्व में शांति, कोविड-19 की समाप्ति तथा महाकुंभ मेला के सकुशल संपन्न होने की प्रार्थना की ।
संघ प्रमुख के हर की पैड़ी पहुंचने पर गंगा सभा के पदाधिकारियों ने उन्हें गंगा जी का सविग्रह पूजन कराया।
हर की पैड़ी पर स्वच्छता,एवं व्यवस्था के लिए गंगा सभा के प्रयासों की सराहना करते हुए भागवत ने कहा कि सेवा भाव से ही समाज और राष्ट्र की उन्नति होती है। उन्होंने कहा कि हमेशा दूसरों के दुःखों के बारे में सोचना भारतीय संस्कृति की विशेषता है।
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